BY
Yoganand Shrivastava
New Delhi : केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच चल रहा टकराव अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। विपक्षी दलों ने एकजुट होकर लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का निर्णय लिया है। मंगलवार को इस संबंध में लोकसभा सचिवालय को एक औपचारिक नोटिस भेजा गया, जिस पर 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक चर्चा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की दूरी को लेकर हो रही है।
New Delhi आर्टिकल 94(c) के तहत प्रस्ताव: भेदभाव के लगे आरोप
New Delhi विपक्षी दलों ने संविधान के अनुच्छेद 94(c) का हवाला देते हुए स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव पेश किया है। नोटिस में मुख्य रूप से स्पीकर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं और उन पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया गया है। प्रस्ताव लाने वाले सांसदों का कहना है कि वे व्यक्तिगत रूप से स्पीकर का सम्मान करते हैं, लेकिन सदन के भीतर विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है, जो लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है।
इन चार प्रमुख बिंदुओं पर घेरा गया स्पीकर को
New Delhi विपक्ष ने अपने नोटिस में चार बड़े कारणों का उल्लेख किया है, जिन्हें आधार बनाकर यह प्रस्ताव लाया गया है:
- राहुल गांधी को बोलने से रोकना: आरोप है कि 2 फरवरी को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को सदन में बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।
- सांसदों का निलंबन: 3 फरवरी को विपक्ष के 8 सांसदों को निलंबित करने की कार्रवाई को विपक्षी दलों ने अनुचित करार दिया है।
- सत्ता पक्ष पर नरमी: 4 फरवरी को सत्ता पक्ष के एक सांसद द्वारा दो पूर्व प्रधानमंत्रियों पर की गई विवादित टिप्पणी के बावजूद उन्हें टोकने या कार्रवाई करने में देरी का आरोप लगाया गया है।
- महिला सांसदों पर टिप्पणी: विपक्षी महिला सांसदों को लेकर स्पीकर द्वारा की गई कुछ टिप्पणियों को भी इस प्रस्ताव में शामिल किया गया है।
राहुल गांधी और ममता की पार्टी ने बनाई दूरी
New Delhi हैरानी की बात यह है कि जहाँ विपक्षी गठबंधन इस प्रस्ताव को लेकर आक्रामक है, वहीं राहुल गांधी ने खुद इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इसके साथ ही, ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भी इस अविश्वास प्रस्ताव से दूरी बनाए रखी है। टीएमसी के किसी भी सांसद ने इस नोटिस पर साइन नहीं किया है, जो इंडिया गठबंधन (I.N.D.I.A.) के भीतर आपसी सहमति की कमी को उजागर करता है। अब देखना यह होगा कि लोकसभा सचिवालय इस नोटिस पर आगे क्या प्रक्रिया अपनाता है।





