Navratri Day 4 Devi Kushmanda: नवरात्रि के चौथे दिन करें मां कूष्माण्डा की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजन विधि

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Navratri Day 4 Devi Kushmanda

Navratri Day 4 Devi Kushmanda: नवरात्रि का पर्व अपने साथ भक्ति, ऊर्जा और सकारात्मकता लेकर आता है। चैत्र नवरात्रि 2026 का चौथा दिन मां कूष्माण्डा को समर्पित है, जिसकी पूजा 22 मार्च, रविवार को की जाएगी। मान्यता है कि मां कूष्माण्डा ने अपनी दिव्य मुस्कान से सृष्टि की रचना की थी, इसलिए उन्हें आदिशक्ति के रूप में पूजा जाता है।

पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि 19 मार्च 2026 से शुरू हो रही है। चतुर्थी तिथि 21 मार्च की रात 9:46 बजे प्रारंभ हो जाएगी, लेकिन उदया तिथि के अनुसार 22 मार्च को ही पूजा करना श्रेष्ठ माना जाएगा। खास बात यह है कि यह दिन रविवार है, जो सूर्य देव से जुड़ा है और मां कूष्माण्डा का संबंध भी सूर्य मंडल से माना जाता है।

‘कूष्माण्डा’ शब्द तीन भागों से मिलकर बना है—‘कु’ यानी छोटा, ‘उष्मा’ यानी ऊर्जा और ‘अंड’ यानी ब्रह्मांड। मान्यता है कि देवी ने अपनी हल्की मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसी कारण उन्हें सृष्टि की जननी और प्रकाश की प्रतीक माना जाता है।

मां कूष्माण्डा का स्वरूप

मां कूष्माण्डा को अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है, क्योंकि उनके आठ हाथ होते हैं। उनके हाथों में अमृत कलश, धनुष-बाण, चक्र, कमल, जप माला, गदा और कमंडल जैसे प्रतीक होते हैं, जो शक्ति, भक्ति और संतुलन का संदेश देते हैं। उनका वाहन सिंह है, जो साहस और धर्म का प्रतीक माना जाता है।

मां कूष्माण्डा की पूजा के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर देवी की प्रतिमा स्थापित करें और गंगाजल से शुद्धिकरण करें। इसके बाद मां का आवाहन कर पुष्प अर्पित करें और षोडशोपचार विधि से पूजा करें।

मां कूष्माण्डा को कुम्हड़ा (पेठा) अत्यंत प्रिय माना जाता है, इसलिए इसका भोग लगाना शुभ होता है। पूजा के दौरान “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कूष्माण्डायै नमः” मंत्र का जाप करना लाभकारी होता है। अंत में आरती कर क्षमा प्रार्थना करना आवश्यक माना गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां कूष्माण्डा की पूजा से सूर्य ग्रह मजबूत होता है, जिससे आत्मविश्वास और मान-सम्मान में वृद्धि होती है। इसके अलावा यह पूजा स्वास्थ्य लाभ भी देती है और मानसिक शांति प्रदान करती है। नियमित आराधना से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

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