MP news: होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (HMAI) के स्वर्ण जयंती समारोह एवं ऑल इंडिया होम्योपैथी कांग्रेस के अंतिम दिन कोलकाता स्थित बिस्वा बंगला कन्वेंशन सेंटर में आयोजित वैज्ञानिक सत्र अत्यंत ज्ञानवर्धक, शोधोन्मुख एवं प्रेरणादायक रहा।
डे–3 के पैरेलल साइंटिफिक सेशन (सेशन–32) में देश के विभिन्न राज्यों से आए ख्यातिप्राप्त विद्वान वक्ताओं ने प्रमाण आधारित केस रिपोर्ट्स तथा नवीन एवं समसामयिक विषयों पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। सत्र में त्वचा रोग, विटिलिगो, कैंसर केयर, पुरुष बांझपन, ऑर्थोपेडिक विकार, बाल रोग एवं एग्रो–होम्योपैथी जैसे विविध विषयों को संक्षेप में लेकिन अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
प्रमुख वक्ता
डॉ. अन्वेषा दत्ता (फोरफुट एक्ज़िमा),
डॉ. सौम्यनाथ मलिक (विटिलिगो में संवैधानिक उपचार),
डॉ. मिर्ज़ा नूर आलम (कैंसर केयर में होम्योपैथी),
डॉ. सुखजीत कौर (एज़ूस्पर्मिया से पितृत्व तक की प्रेरक यात्रा),
डॉ. पंकज श्रीवास्तव (नॉक नी डिसएबिलिटी),
डॉ. अरिजीत पाल चौधरी (बच्चे के हाइड्रोसील का सफल उपचार),
डॉ. वैभव जैन (एग्रो–होम्योपैथी द्वारा खरपतवार प्रबंधन)
तथा डॉ. योगेश धोंडीराज निटुंकर (अनुभव को साक्ष्य में परिवर्तित करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया) शामिल रहे।
इंदौर के वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. ए. के. द्विवेदी रहे सत्र के प्रमुख आकर्षण
इस वैज्ञानिक सत्र के को–चेयरपर्सन के रूप में इंदौर के वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक, शिक्षाविद् एवं प्रोफेसर डॉ. ए. के. द्विवेदी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण एवं प्रभावशाली रही। अपने विशेषज्ञ विचार व्यक्त करते हुए डॉ. द्विवेदी ने कहा कि होम्योपैथी की वास्तविक शक्ति वैज्ञानिक अनुशासन, ईमानदार क्लिनिकल प्रैक्टिस तथा सुदृढ़ केस डॉक्युमेंटेशन में निहित है।
उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि “अनुभव को साक्ष्य में बदलने की प्रक्रिया ही होम्योपैथी को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर वैज्ञानिक रूप से और अधिक सशक्त बनाएगी।” उनके अकादमिक मार्गदर्शन एवं दूरदर्शी विचारों से सत्र को एक विशिष्ट ऊँचाई प्राप्त हुई।
समग्र रूप से बिस्वा बंगला कन्वेंशन सेंटर में आयोजित यह वैज्ञानिक सत्र न केवल शैक्षणिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध रहा, बल्कि इसने यह भी स्पष्ट किया कि आधुनिक, शोध–आधारित होम्योपैथी वर्तमान स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में पूर्णतः सक्षम है।
एचएमएआई का स्वर्ण जयंती सम्मेलन भविष्य में होम्योपैथिक शिक्षा, शोध एवं क्लिनिकल उत्कृष्टता की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर सिद्ध होगा।





