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MP news: कर्मचारी संगठनों में असंतोष, कैबिनेट के फैसले पर उठे सवाल

कर्मचारी संगठनों में असंतोष, कैबिनेट के फैसले पर उठे सवाल

BY: Yoganand Shrivastva

MP News: मध्यप्रदेश की मोहन सरकार द्वारा हाल ही में कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसले को लेकर कर्मचारी संगठनों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। सरकार ने सरकारी नौकरियों में पदों की जटिलता समाप्त करने के उद्देश्य से श्रेणियों की संख्या 10 से घटाकर 5 कर दी है। इस निर्णय के तहत दैनिक वेतन भोगी, कार्यभारित और आकस्मिक निधि स्थापना जैसे पदों को भविष्य में समाप्त करने का प्रावधान किया गया है।

कैबिनेट के फैसले में क्या है प्रावधान

  1. कार्यभारित और आकस्मिक निधि स्थापना के पदों को अब ‘गैर-स्वीकृत’ माना जाएगा।
  2. इन श्रेणियों में आगे कोई नई नियुक्ति नहीं की जाएगी।
  3. सरकारी सेवाओं में मौजूद विभिन्न प्रकार की श्रेणियों को समेटकर केवल 5 आवश्यक श्रेणियों में सीमित किया गया है।

सरकार का तर्क है कि अब तक नियमित, संविदा, आउटसोर्स, अंशकालीन जैसी कई श्रेणियों के कारण प्रशासनिक ढांचा बिखरा हुआ था। इसका सबसे अधिक नुकसान कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन और सेवा लाभों के मामलों में उठाना पड़ता था।

सरकार का दावा: कर्मचारियों को मिलेगा स्थायी लाभ

शासन का कहना है कि इस फैसले से पेंशन व्यवस्था सरल होगी, सेवा लाभों में स्पष्टता आएगी और भविष्य की भर्ती नीति भी अधिक व्यवस्थित बनेगी। सरकार के अनुसार यह कदम कर्मचारियों के शोषण को रोकने और प्रशासनिक जटिलताओं को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

कर्मचारी संगठनों का विरोध

दैनिक वेतन भोगी, कार्यभारित स्थाईकर्मी और आकस्मिक निधि स्थापना से जुड़े कर्मचारियों ने इस निर्णय का विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि श्रेणियों को समाप्त करना उनके हित में नहीं है, बल्कि इससे उनकी समस्याएं और बढ़ सकती हैं।

वित्त विभाग पर लगाए आरोप

  1. कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि जिन पदों को नियमित श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए था, उन्हें समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया।
  2. संगठनों का कहना है कि वित्त विभाग के अधिकारियों ने योजनाबद्ध तरीके से इन श्रेणियों को खत्म करवाने का निर्णय करवा दिया।
  3. कर्मचारी समान सेवा शर्तें, नियमितीकरण और समान सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।

कुल मिलाकर सरकार जहां इस फैसले को सुधारात्मक और हितकारी बता रही है, वहीं कर्मचारी संगठन इसे अपने अधिकारों पर चोट मान रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।

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