By : Pramod Shrivastava
MadhyaPradesh : मध्यप्रदेश में मोहन यादव सरकार अब ग्रामीण विकास को सिर्फ योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि ‘आर्थिक आत्मनिर्भरता आधारित गांव’ को केंद्र में रखकर एक नया मॉडल खड़ा किया जा रहा है। यह मॉडल तीन मजबूत स्तंभों, कृषि-सिंचाई, ग्रामीण आधारभूत ढांचा और रोजगारपरक कौशल पर टिका है। प्रदेश में उभरता यह नया ग्रामीण विकास मॉडल अब केवल सड़क-पानी-बिजली तक सीमित नहीं है, बल्कि खेती से आय, खेती में सिंचाई का रकबा बढ़ाना, गांव में उद्योग और युवाओं के लिये कौशल और रोजगार के जरिए गांवों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
राज्य सरकार का जोर अब उत्पादन से आगे बढ़कर किसानों की आय बढ़ाने पर है। किसानों के लिए सिंचाई सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। नदी जोड़ो अभियान और बड़ी-मध्यम सिंचाई परियोजनाओं से खेतों तक पानी पहुंचाया जा रहा है। सूक्ष्म सिंचाई और फसल विविधीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिससे मध्य प्रदेश में खेती की तस्वीर तेजी से बदल रही है। खेतों तक पानी की पहुंच बढ़ने से न केवल फसल के उत्पादन में सुधार हुआ है, बल्कि किसानों की आय और खेती की स्थिरता भी मजबूत हुई है।
MadhyaPradesh : सरकार का फोकस खेती से आमदनी बढ़ाकर अन्नदाता की खुशहाली
मध्य प्रदेश में गांव-गांव तक कनेक्टिविटी और सुविधाओं के विस्तार को ग्रामीण विकास के नए मॉडल में बुनियादी ढांचे को रीढ़ माना गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और राज्य योजनाओं के जरिए हर बसाहट को सड़क से जोड़ने का लक्ष्य पूरा हो रहा है। गांवों में बिजली, पेयजल और डिजिटल कनेक्टिविटी एक साथ आगे बढ़ रही है। पंचायत स्तर पर ई-गवर्नेंस और ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार तेजी से हुआ है। सरकार की रणनीति साफ है कि गांव से पलायन रोको और गांव में ही रोजगार दो।

इसके लिये कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है। कृषि आधारित रोजगारपरक उद्योगों पर केंद्रित नीतियों का क्रियान्वयन किया जा रहा है। फूड प्रोसेसिंग, डेयरी, हैंडलूम-हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने की योजना पर काम किया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों को वित्तीय सहायता, कौशल विकास और युवा केंद्रित नीति, ग्रामीण युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट अब इस मॉडल का अहम हिस्सा बन चुका है।
MadhyaPradesh : किसानों को ‘अन्नदाता’ के साथ-साथ ‘ऊर्जादाता’ बनाना लक्ष्य
किसानों को बिजली में आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही हैं। इसका मुख्य उद्देश्य सिंचाई की लागत कम करना और किसानों को ‘अन्नदाता’ के साथ-साथ ‘ऊर्जादाता’ बनाना है। सरकार ने राज्य के किसानों को बिजली में आत्मनिर्भर बनाने के लिए अगले तीन वर्षों में 32 लाख सोलर पंप उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है। जिसके लिये सरकार सोलर पंप की लागत का लगभग 90 प्रतिशत तक अनुदान देती है, जिससे किसान को केवल 10 प्रतिशत राशि का भुगतान करना पड़ता है।

इस योजना के जरिए घरों और कृषि कार्यों के लिए मुफ्त बिजली और मुनाफे का प्रावधान किया गया है। सरकार का यह कदम किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने का माध्यम बनता जा रहा है। ग्रामीण विकास को ध्यान में रखते हुए स्थानीय जरूरतों के मुताबिक प्रशिक्षण, स्वरोजगार और स्टार्ट-अप को बढ़ावा, महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर विशेष जोर, प्रशासनिक स्तर पर ‘डिलिवरी मॉडल’ में बदलाव के जरिए सरकार का फोकस अब वेलफेयर से वेल्थ क्रिएशन की ओर शिफ्ट हो रहा है।

ग्रामीण विकास को योजनाओं की फाइलों से निकालकर जमीन पर असर तक पहुंचाने के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय, जिला और पंचायत स्तर पर निगरानी तंत्र, और समयबद्ध लक्ष्य तय किए जा रहे हैं। यही वजह है कि मध्यप्रदेश में ग्रामीण विकास का नया मॉडल जन-भागीदारी और तकनीक के मेल से ग्रामीण इलाकों को आर्थिक समृद्धि का नया केंद्र बना रहा है।
मध्यप्रदेश में ग्रामीण विकास का नया मॉडल ‘विकसित पंचायत, आत्मनिर्भर गांव’ की अवधारणा पर आधारित है, जो स्थानिक योजना, GIS मैपिंग, और स्थानीय अर्थव्यवस्था (कृषि-पशुपालन) को मजबूत करने पर केंद्रित है। यह मॉडल ‘लखपति दीदी’ अभियान, ग्रामीण इन्क्यूबेशन सेंटर, और ‘मुख्यमंत्री वृन्दावन ग्राम योजना’ के माध्यम से बुनियादी ढांचे और रोजगार में क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है। यह मॉडल न केवल बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान देता है, बल्कि ‘स्मार्ट विलेज’ और ‘आत्मनिर्भर गांव’ की अवधारणा को धरातल पर उतारने का प्रयास है।
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