Madhya Pradesh ग्लोबल स्किल्स पार्क, भोपाल में आयोजित इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों ने शिरकत की। राज्यमंत्री श्री टेटवाल ने अपने संबोधन में कहा कि औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) की गुणवत्ता और जवाबदेही तय किए बिना युवाओं का कौशल विकास संभव नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि नए ‘आईटीआई संबद्धता मानदंड-2025’ प्रशिक्षण संस्थानों को न केवल अधिक सक्षम बनाएंगे, बल्कि उन्हें उद्योगों की वर्तमान जरूरतों के अनुरूप ढालेंगे।
डिजिटल और पारदर्शी होगी संबद्धता प्रक्रिया
Madhya Pradesh कार्यशाला में साझा की गई जानकारी के अनुसार, संशोधित मानदंडों का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अब आईटीआई संस्थानों की संबद्धता (Affiliation) प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और समयबद्ध होगी। नए संस्थानों की स्थापना, ट्रेड स्वीकृति और नवीनीकरण की जटिलताओं को समाप्त कर दिया गया है। पारदर्शी निरीक्षण और मूल्यांकन प्रणाली से संस्थानों को अनावश्यक सरकारी औपचारिकताओं से राहत मिलेगी, जिससे वे केवल प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
उद्योगों को मिलेगा ‘रेडी-टू-वर्क’ मानव संसाधन
Madhya Pradesh श्री टेटवाल ने रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कौशल प्रशिक्षण को महज संख्या बढ़ाने के बजाय उसकी गुणवत्ता और उद्योग जगत में उसकी प्रासंगिकता पर केंद्रित किया जा रहा है। नए मानदंडों से प्रशिक्षण प्रणाली में एकरूपता आएगी, जिससे उद्योगों को उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार कुशल कर्मचारी मिल सकेंगे। इससे उद्योगों और शिक्षण संस्थानों के बीच का समन्वय और अधिक मजबूत होगा।
क्षेत्रीय सहयोग और भविष्य की कार्ययोजना
Madhya Pradesh इस कार्यशाला में केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय (DGT), नई दिल्ली के प्रतिनिधियों ने विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। इसमें मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के शासकीय एवं निजी आईटीआई, इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य इन नए मानदंडों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी हितधारकों को एक मंच पर लाना था, ताकि कौशल विकास का लाभ अंतिम छोर के युवा तक पहुँच सके।





