Isa Ahmad
Live Voter Name Deletion Case: भानुप्रतापपुर में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक जिंदा मतदाता को मृत घोषित कर फॉर्म-7 के माध्यम से मतदाता सूची से नाम हटाने का आवेदन किया गया। इस घटना ने चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पीड़ित मतदाता शामिउल्ला अंसारी ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, “मैं जिंदा हूं, इसके बावजूद मुझे मृत बताकर मेरा नाम मतदाता सूची से काटने की कोशिश की गई।”
Live Voter Name Deletion Case: राजनीतिक आरोप और लोकतंत्र पर सवाल
इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। विधायक श्रीमती सावित्री मण्डावी ने आरोप लगाया कि एक विशेष धर्म के लोगों को निशाना बनाकर उनके नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है।
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Live Voter Name Deletion Case: प्रशासन ने दिए जांच के आदेश
प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि
वर्ष 2002 की मतदाता सूची में दर्ज मतदाताओं के नाम किसी भी परिस्थिति में नहीं काटे जाएंगे। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद सच्चाई सामने आएगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जांच जारी है और अब यह देखना अहम होगा कि क्या यह केवल एक तकनीकी गलती है या फिर Live Voter Name Deletion Case के पीछे कोई सुनियोजित साजिश है।





