BY: Yoganand Shrivastva
भारतीय रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ी सफलता मिली है। टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) ने स्पेन की इंजीनियरिंग कंपनी इंद्रा के साथ साझेदारी कर नौसेना के लिए अगली पीढ़ी का उन्नत एयर सर्विलांस रडार तैयार किया है। यह पहली बार है जब लांजा-एन (LANZA-N) रडार सिस्टम स्पेन के बाहर चालू किया गया है।
भारत में तैयार हो रहा अगली पीढ़ी का नौसैनिक रडार
टीएएसएल ने घोषणा की है कि कंपनी अब नई पीढ़ी के नौसैनिक 3डी एयर सर्विलांस रडार (3D-ASR) का निर्माण और असेंबल करने वाली भारत की पहली कंपनी बन गई है। यह रडार भारतीय नौसेना के युद्धपोतों पर तैनात किया जा रहा है।
कंपनी के मुताबिक, यह उपलब्धि रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता (Atmanirbhar Bharat) को मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। रडार सिस्टम को नौसैनिक युद्धपोतों के सभी उपकरणों के साथ बिना किसी रुकावट के जोड़ा गया और समुद्र में कठिन परीक्षणों के बाद इसे मंजूरी मिली।
कर्नाटक में बना हाई-टेक रडार प्लांट
रडार सिस्टम के बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए कर्नाटक स्थित टीएएसएल प्लांट में Radar Assembly, Integration & Testing Facility स्थापित की गई है। इससे नौसेना को जल्द और बड़े पैमाने पर रडार उपलब्ध कराना संभव होगा।
टीएएसएल और इंद्रा के अधिकारियों के बयान
टीएएसएल के CEO और MD सुकरण सिंह ने कहा:
“इंद्रा के साथ हमारा सहयोग भारत की रडार निर्माण क्षमताओं को नए स्तर पर ले जाएगा। तकनीकी विशेषज्ञता, जमीनी तालमेल और मजबूत स्थानीय सप्लाई चेन के साथ हम उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों का एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र तैयार कर रहे हैं।”
इंद्रा की नेवल बिजनेस यूनिट हेड एना बुएंडिया ने कहा:
“यह परियोजना केवल रडार आपूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह टीएएसएल के साथ एक लंबी साझेदारी की दिशा में कदम है। बेंगलुरु में रडार फैक्ट्री की स्थापना से उत्पादन तेज होगा और भारतीय नौसेना को लोकल सपोर्ट आसानी से मिलेगा।”
लांजा-एन रडार की खासियत
- लंबी दूरी की निगरानी क्षमता: यह 3D रडार सिस्टम हवाई और समुद्री लक्ष्यों की दूर से पहचान करने में सक्षम है।
- उन्नत टारगेट ट्रैकिंग: विभिन्न प्रकार के ड्रोन, सुपरसोनिक फाइटर जेट्स, एंटी-रेडिएशन मिसाइल और नौसैनिक जहाजों को ट्रैक कर सकता है।
- उच्च सुरक्षा मानक: यह रडार सामरिक निगरानी के लिए सबसे आधुनिक तकनीकों से लैस है।
- भारत में पहली तैनाती: यह पहली बार है कि यह स्पेन के बाहर भारतीय युद्धपोत पर सक्रिय हुआ है।





