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पांच वर्षों में भी उपेक्षित लखनघाट, रामपथ गमन में शामिल होने को तरस रहा पवित्र स्थल

Lakhan Ghat neglected even in five years, the holy place is longing to be included in the Rampath Yatra

छत्तीसगढ़ को भगवान श्रीराम की ननिहाल कहा जाता है, जहां उनकी माता कौशल्या का मंदिर राजधानी रायपुर के चंदखुरी में स्थित है। यहां भगवान श्रीराम की 51 फीट ऊंची प्रतिमा भी स्थापित है। छत्तीसगढ़वासियों के लिए यह गौरव का विषय है कि भगवान श्रीराम का वनवास काल का अधिकांश समय इस क्षेत्र में बीता। ऐसे ही एक पवित्र और ऐतिहासिक स्थल का नाम है लखनघाट, जो कि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही ब्लॉक में स्थित है।

जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित लखनघाट न सिर्फ अपनी पौराणिक मान्यताओं के लिए, बल्कि अपने नैसर्गिक सौंदर्य और ऐतिहासिक रहस्यों के लिए भी प्रसिद्ध है। किंवदंती है कि रामायण काल में भगवान श्रीराम, माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ इस स्थान पर आए थे। यहां लक्ष्मण जी ने सोननदी के किनारे घाट बनाकर भगवान शिव की पूजा की थी, जिससे यह स्थल “लखनघाट” के नाम से जाना गया।

अस्तित्व की तलाश में लखनघाट

जिले के गठन को पांच वर्ष बीत चुके हैं, परंतु लखनघाट आज भी शासन-प्रशासन की अनदेखी का शिकार बना हुआ है। धार्मिक, ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण यह स्थल अभी तक श्रीराम पथ गमन योजना में शामिल नहीं किया गया है। जबकि प्रदेश की पूर्ववर्ती सरकार के दौरान जब रामपथगमन मार्ग चिन्हांकित किए जा रहे थे, तब स्थानीय जनों को आशा बंधी थी कि लखनघाट को भी उस पथ में स्थान मिलेगा। लेकिन अब तक यह उम्मीद अधूरी ही रह गई है।

पुरातात्विक महत्त्व और उपेक्षा

लखनघाट क्षेत्र में समय-समय पर की गई खुदाई में 14वीं और 15वीं शताब्दी की मूर्तियाँ प्राप्त हुई हैं, जो इस क्षेत्र की ऐतिहासिक गहराई को दर्शाती हैं। लेकिन इन मूर्तियों के संरक्षण या अध्ययन की दिशा में सरकार द्वारा कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया है। यह स्थान शोधकर्ताओं और इतिहासकारों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र हो सकता है, बशर्ते इसकी ओर गंभीर ध्यान दिया जाए।

भक्ति में बाधा बनते शराब-मांस के ठेले

धार्मिक महत्व के इस स्थल के आसपास मांस और मदिरा की बिक्री खुलेआम हो रही है, जिससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत होती हैं। यह स्थिति न सिर्फ धार्मिक वातावरण को दूषित करती है, बल्कि प्रशासन की लापरवाही को भी उजागर करती है।

मेला और मांगें

हर साल मकर संक्रांति पर यहां भव्य मेला आयोजित होता है, जिसमें छत्तीसगढ़ सहित उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्यप्रदेश से हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं। स्थानीय ग्रामीण वर्षों से मांग कर रहे हैं कि लखनघाट को श्रीराम पथ गमन योजना में शामिल किया जाए और इसे धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए।

क्या उठाएगी सरकार ठोस कदम?

वर्तमान सरकार धार्मिक स्थलों के विकास और संरक्षण को लेकर लगातार दावे कर रही है। लेकिन लखनघाट जैसे महत्वपूर्ण स्थल की अनदेखी इन दावों पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। अब देखने वाली बात होगी कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार इस उपेक्षित स्थल के संरक्षण और विकास के लिए कब और क्या ठोस कदम उठाएगी।

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