BY
Yoganand Shrivastava
April Fools’ Day हर साल 1 अप्रैल को दुनिया भर में ‘अप्रैल फूल डे’ यानी मूर्ख दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन लोग दोस्तों और परिवार के साथ हल्के-फुल्के मजाक करते हैं और एक-दूसरे को बेवकूफ बनाने की कोशिश करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस परंपरा की शुरुआत कहाँ से हुई? आइए, इसके इतिहास और इससे जुड़ी दिलचस्प मान्यताओं पर नजर डालते हैं।
April Fools’ Day फ्रांस और कैलेंडर का बदलाव: जहाँ से हुई शुरुआत
ज्यादातर इतिहासकारों का मानना है कि अप्रैल फूल डे की शुरुआत साल 1582 में फ्रांस से हुई थी। दरअसल, उस समय फ्रांस में जूलियन कैलेंडर की जगह ग्रेगोरियन कैलेंडर को अपनाया गया था।
- बदलाव क्या था? पुराने कैलेंडर के अनुसार नया साल 1 अप्रैल के आसपास मनाया जाता था, लेकिन नए कैलेंडर के लागू होने के बाद नया साल 1 जनवरी को तय कर दिया गया।
- मजाक का कारण: उस दौर में संचार के साधन आज जैसे नहीं थे, इसलिए कई लोगों को इस बदलाव की जानकारी नहीं मिली और वे 1 अप्रैल को ही नया साल मनाते रहे। जो लोग समय के साथ अपडेट हो चुके थे, उन्होंने पुरानी तारीख पर नया साल मनाने वालों का मजाक उड़ाना शुरू कर दिया और उन्हें ‘अप्रैल फूल’ कहा जाने लगा।
April Fools’ Day साहित्य और ‘कैंटरबरी टेल्स’ का संबंध
एक अन्य मान्यता के अनुसार, अप्रैल फूल का जिक्र मशहूर लेखक जॉफ्री चौसर की 14वीं शताब्दी की रचना ‘द कैंटरबरी टेल्स’ में भी मिलता है।
विद्वानों का मानना है कि इस कहानी में मार्च के 32वें दिन (जो असल में 1 अप्रैल होता है) का उल्लेख एक मजाकिया संदर्भ में किया गया था। यहीं से धीरे-धीरे यह दिन लोगों के बीच मजाक और मस्ती का पर्याय बन गया।
April Fools’ Day प्राचीन रोम का ‘हिलेरिया’ उत्सव
इतिहास के पन्ने पलटें तो रोम में मनाया जाने वाला ‘हिलेरिया’ (Hilaria) त्योहार भी अप्रैल फूल डे जैसा ही प्रतीत होता है। मार्च के अंत में मनाए जाने वाले इस उत्सव में लोग अपनी पहचान छुपाने के लिए अलग-अलग तरह के भेष (Disguise) बदलते थे। इस दौरान वे दूसरों की नकल उतारते थे और खेल-खेल में एक-दूसरे को मूर्ख बनाते थे।
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