Khabar hatke: केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित प्रसिद्ध श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर में 23 सितंबर 2026 को ऐसा अद्भुत नजारा देखने को मिला, जो साल में सिर्फ दो बार दिखाई देता है। विषुव के मौके पर डूबते सूर्य की रोशनी मंदिर की संरचना में बनी पांच खिड़कियों से क्रमशः गुजरती नजर आई। इस दुर्लभ दृश्य का वीडियो उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने भी सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद यह घटना एक बार फिर चर्चा में आ गई।
मंदिर की वास्तुकला और सूर्य की स्थिति के बीच यह तालमेल लंबे समय से लोगों की दिलचस्पी का विषय रहा है। सूर्यास्त के समय सूर्य मंदिर के गोपुरम में बने अलग-अलग खुले हिस्सों के पीछे से क्रमवार दिखाई देता है। यह दृश्य इस बात की ओर ध्यान खींचता है कि मंदिर की संरचना में सूर्य की गति और दिशा को ध्यान में रखते हुए किस तरह की वास्तु योजना अपनाई गई होगी।
Khabar hatke: साल में सिर्फ दो बार दिखाई देता है यह नजारा
पद्मनाभस्वामी मंदिर में सूर्य का यह विशेष दृश्य विषुव के आसपास दिखाई देता है। विषुव वह खगोलीय घटना है जब सूर्य पृथ्वी के भूमध्यरेखीय क्षेत्र के ऊपर होता है और दिन तथा रात की अवधि लगभग बराबर होती है। यह घटना सामान्य तौर पर साल में दो बार होती है, एक बार मार्च में और दूसरी बार सितंबर में।
23 सितंबर के विषुव के दौरान तिरुवनंतपुरम में मंदिर के गोपुरम के साथ सूर्य का यह विशेष संरेखण देखने को मिला। सूर्य के धीरे-धीरे नीचे आने के साथ उसकी रोशनी मंदिर की खिड़कियों के अलग-अलग हिस्सों से दिखाई देती है, जिससे कुछ समय के लिए पूरा दृश्य बेहद खास नजर आता है।
Khabar hatke: पांच खिड़कियों से होकर नीचे आया सूर्य
इस घटना की सबसे खास बात सूर्य का मंदिर की पांच खिड़कियों से क्रमवार गुजरता दिखाई देना है। शुरुआत में डूबता सूरज सबसे ऊपरी हिस्से में नजर आता है। इसके बाद जैसे-जैसे सूर्य क्षितिज की ओर नीचे जाता है, उसकी स्थिति अगली खिड़कियों के साथ बदलती जाती है।
आखिर में सूर्य निचले हिस्सों से दिखाई देता हुआ क्षितिज के नीचे चला जाता है। कुछ ही समय में पूरा दृश्य समाप्त हो जाता है। इस दौरान मंदिर के गोपुरम और सूर्य की रोशनी का मेल देखने वालों के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाता है।
Khabar hatke: आनंद महिंद्रा ने भी शेयर किया वीडियो
उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने 23 सितंबर को इस दुर्लभ घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। उन्होंने पद्मनाभस्वामी मंदिर में होने वाले इस सूर्य-संरेखण को प्राचीन वास्तुकला और खगोलीय समझ के मेल का उदाहरण बताया। इससे पहले मार्च 2026 में भी उन्होंने मंदिर से जुड़े इसी खगोलीय पहलू को लेकर पोस्ट किया था और विषुव के दिन यहां मौजूद रहने की इच्छा जाहिर की थी।
आनंद महिंद्रा की पोस्ट के बाद मंदिर की वास्तुकला और इस प्राकृतिक घटना को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी। उनके द्वारा साझा किए गए वीडियो में सूर्यास्त के दौरान मंदिर के गोपुरम की संरचना के साथ सूर्य की स्थिति का अद्भुत तालमेल दिखाई देता है।
Khabar hatke: प्राचीन वास्तुकला में सूर्य की दिशा का ध्यान
पद्मनाभस्वामी मंदिर की संरचना को लेकर वास्तु और खगोलीय संरेखण की चर्चा लंबे समय से होती रही है। मंदिर का प्रवेश गोपुरम पूर्व-पश्चिम दिशा के अनुरूप होने के कारण विषुव के समय सूर्यास्त के दौरान एक खास संरेखण देखने को मिलता है।
https://publish.x.com/?url=https://twitter.com/anandmahindra/status/2102809536117842397
यही वजह है कि विषुव के दिनों में मंदिर का गोपुरम केवल धार्मिक और स्थापत्य दृष्टि से ही नहीं, बल्कि खगोलीय घटना के संदर्भ में भी लोगों का ध्यान आकर्षित करता है। सूर्य की स्थिति में होने वाला मौसमी बदलाव इस दृश्य को साल के बाकी दिनों से अलग बनाता है।
Khabar hatke: क्या होता है विषुव
विषुव एक खगोलीय घटना है। इस दौरान सूर्य पृथ्वी के भूमध्यरेखीय क्षेत्र के ऊपर दिखाई देता है और दुनिया के कई हिस्सों में दिन तथा रात की अवधि लगभग बराबर होती है। साल में दो प्रमुख विषुव होते हैं, जिनमें एक मार्च और दूसरा सितंबर के आसपास आता है।
सितंबर वाला विषुव उत्तरी गोलार्ध में शरद ऋतु की शुरुआत से जुड़ा माना जाता है। इसी अवधि के दौरान पद्मनाभस्वामी मंदिर में सूर्यास्त के समय होने वाला विशेष संरेखण भी देखने को मिलता है।
Khabar hatke: मंदिर और विज्ञान का अनोखा मेल
श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर अपनी धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान के साथ अपनी वास्तुकला के लिए भी प्रसिद्ध है। मंदिर की संरचना में बारीक नक्काशी, विशाल गोपुरम और पारंपरिक वास्तुशैली दिखाई देती है। यहां सूर्य के साथ दिखाई देने वाला यह विशेष संरेखण मंदिर की वास्तुकला को एक अलग वैज्ञानिक और खगोलीय संदर्भ भी देता है।
सूर्य की स्थिति के अनुसार बदलता यह दृश्य यह समझने का अवसर देता है कि प्राचीन स्थापत्य में दिशा, प्रकाश और प्राकृतिक घटनाओं को किस तरह ध्यान में रखा जाता था। इसी वजह से विषुव के समय मंदिर में होने वाला यह सूर्यास्त स्थानीय लोगों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का विषय बन जाता है।
Khabar hatke: अगली बार कब दिखेगा यह नजारा
सितंबर के विषुव के बाद इस तरह का अगला अवसर मार्च 2027 में आएगा। विषुव साल में दो बार होने के कारण पद्मनाभस्वामी मंदिर में सूर्य के इस विशेष संरेखण को देखने के लिए मार्च और सितंबर के आसपास के दिनों को खास माना जाता है। हालांकि वास्तविक दृश्य मौसम और आसमान की स्थिति पर भी निर्भर करता है।
इस बार भी तिरुवनंतपुरम में कई लोग इस दुर्लभ दृश्य को देखने के लिए मंदिर के आसपास पहुंचे थे। हालांकि मौसम में बादल होने पर सूर्य का दृश्य स्पष्ट रूप से दिखाई देना मुश्किल हो सकता है।
श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर में दिखाई देने वाला यह सूर्यास्त एक तरफ प्राकृतिक खगोलीय घटना है, तो दूसरी तरफ मंदिर की वास्तुकला के साथ उसका अनोखा तालमेल इसे खास बनाता है। आनंद महिंद्रा द्वारा वीडियो साझा किए जाने के बाद इस दुर्लभ नजारे ने सोशल मीडिया पर भी लोगों का ध्यान खींचा है।


