Khabar hatke: यूट्यूब पर वीडियो बनाने वाले एक 9 साल के बच्चे ने अपने चैनल की पहुंच बढ़ाने के लिए ऐसा कदम उठा लिया, जिसका असर अब उसके परिवार पर पड़ता दिखाई दे रहा है। बच्चे ने अपने वीडियो पर ज्यादा व्यूज और सब्सक्राइबर्स हासिल करने के चक्कर में अपने पिता की कंपनी के क्रेडिट कार्ड से करीब 1 लाख 18 हजार डॉलर खर्च कर डाले। भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग 1.13 करोड़ रुपये बैठती है।
इस पूरे मामले का खुलासा बच्चे के पिता डेव ने खुद किया है। उन्होंने अपने बेटे के यूट्यूब चैनल ‘माइटी माइक प्लेज’ पर एक वीडियो शेयर कर बताया कि आखिर इतनी बड़ी रकम विज्ञापनों पर कैसे खर्च हो गई।
Khabar hatke: गेमिंग वीडियो बनाता था 9 साल का माइक
डेव के मुताबिक, उनका 9 वर्षीय बेटा माइक गेमिंग वीडियो बनाकर यूट्यूब पर अपलोड करता था। वह मुख्य रूप से माइनक्राफ्ट और रोब्लॉक्स जैसे गेम खेलता था और इन्हीं से जुड़े वीडियो अपने चैनल पर डालता था।
हालांकि, चैनल पर वीडियो डालने के बावजूद जब उसे उम्मीद के मुताबिक व्यूज नहीं मिल रहे थे, तो उसके पिता ने बेटे का उत्साह बढ़ाने के लिए एक छोटा सा विज्ञापन चलाने का फैसला किया। मार्केटिंग क्षेत्र में काम करने वाले डेव ने अपनी कंपनी के क्रेडिट कार्ड से करीब 20 डॉलर यानी लगभग 1900 रुपये का विज्ञापन चलाया।
माइक ने इस दौरान अपने पिता को विज्ञापन की प्रक्रिया करते हुए देख लिया। यही छोटी सी बात बाद में परिवार के लिए बड़ी परेशानी की वजह बन गई।
Khabar hatke: बच्चे ने समझा ज्यादा पैसा लगाने से बढ़ेंगे व्यूज
माइक ने अपने पिता को विज्ञापन पर पैसे खर्च करते देखा और अपने हिसाब से इसका सीधा मतलब निकाल लिया कि अगर ज्यादा पैसे लगाए जाएं तो वीडियो को ज्यादा लोग देखेंगे। इसके बाद उसने खुद ही विज्ञापन कैंपेन बनाने शुरू कर दिए।
पिता के गूगल अकाउंट में कंपनी का क्रेडिट कार्ड पहले से सेव था। बताया गया कि कार्ड पर खर्च की कोई स्पष्ट सीमा तय नहीं थी और न ही उस अकाउंट पर पर्याप्त पैरेंटल कंट्रोल मौजूद था। ऐसे में माइक ने लगातार कई विज्ञापन कैंपेन चला दिए।
चूंकि भुगतान के लिए कंपनी का क्रेडिट कार्ड पहले से अकाउंट से जुड़ा हुआ था, इसलिए विज्ञापन कैंपेन के भुगतान आसानी से होते रहे। इस दौरान खर्च लगातार बढ़ता गया और परिवार को इसकी जानकारी काफी देर बाद मिली।
Khabar hatke: तीन हफ्तों में खर्च हो गए 1.18 लाख डॉलर
डेव को इस भारी-भरकम खर्च का पता तब चला, जब उन्हें ऑफिस में फाइनेंस डिपार्टमेंट और मैनेजमेंट के साथ एक मीटिंग के लिए बुलाया गया।
मीटिंग में उनके सामने एक लैपटॉप रखा गया और पिछले करीब तीन हफ्तों में उनके अकाउंट से हुए खर्च का पूरा विवरण दिखाया गया। जब उनसे करीब 1 लाख 18 हजार डॉलर के विज्ञापन खर्च के बारे में सवाल किया गया, तो उन्हें इस रकम के बारे में पता चला।
खर्च की जानकारी देखने के बाद डेव के लिए यह समझना मुश्किल था कि इतनी बड़ी रकम आखिर किस तरह खर्च हो गई। रिकॉर्ड में यह भी दिखाई दे रहा था कि रकम गेमिंग कंटेंट के प्रमोशन पर खर्च हुई थी। इनमें ‘माइटी माइक’ और ‘एपिक रोब्लॉक्स’ जैसे गेमिंग वीडियो से जुड़े प्रमोशन शामिल थे।
Khabar hatke: पिता ने अपनी गलती भी मानी
डेव ने अपने वीडियो में इस घटना की जिम्मेदारी का एक हिस्सा खुद भी स्वीकार किया। उन्होंने माना कि कंपनी के काम से जुड़े अकाउंट में क्रेडिट कार्ड की जानकारी सेव रखना और उस पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं करना उनकी गलती थी।
उनके मुताबिक, अगर अकाउंट पर खर्च की सीमा या उचित पैरेंटल कंट्रोल मौजूद होता, तो शायद इतनी बड़ी रकम खर्च होने से पहले ही यह प्रक्रिया रुक सकती थी।
Khabar hatke: नौकरी जाने और करोड़ों का बिल भरने का डर
इस घटना का सबसे बड़ा असर अब बच्चे के पिता डेव पर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि इस मामले के बाद उनकी नौकरी पर संकट मंडरा रहा है। उन्हें यह भी चिंता है कि कंपनी की ओर से किए गए इस भारी खर्च की भरपाई कहीं उन्हें अपनी जेब से न करनी पड़े।
करीब 1.13 करोड़ रुपये की रकम होने की वजह से यह मामला परिवार के लिए बेहद गंभीर बन गया है। हालांकि, इस खर्च का अंतिम वित्तीय निपटारा किस तरह होगा, यह स्पष्ट नहीं है।
Khabar hatke: माइक से छीने गए गैजेट्स, गेमिंग चैनल भी बंद
घटना सामने आने के बाद माइक को भी सजा दी गई है। उसके सभी गैजेट्स उससे ले लिए गए हैं और उसे घर के काम करने के लिए कहा गया है।
डेव ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल माइक का गेमिंग यूट्यूब चैनल बंद रहेगा। अगर भविष्य में उसे दोबारा चैनल चलाने की अनुमति मिलती है, तो उसके ऑनलाइन काम पर सख्त सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी रखी जाएगी।
यह मामला इस बात का भी उदाहरण है कि डिजिटल विज्ञापन अकाउंट में सेव पेमेंट जानकारी और बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों की निगरानी को लेकर कितनी सावधानी जरूरी है।
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