BY: Yoganand Shrivastva
Moody’s वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी Moody’s Ratings ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले एजेंसी ने 6 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान जताया था।
Moody’s मूडीज का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति से बढ़ने वाले देशों में शामिल रहेगा।
मजबूत खपत और निवेश से मिली रफ्तार
Moody’s एजेंसी के अनुसार, वर्ष 2026 की पहली छमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था ने 8.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। इस प्रदर्शन के पीछे घरेलू मांग, निजी खपत में बढ़ोतरी और स्थिर निवेश गतिविधियों की अहम भूमिका रही है।
सरकार द्वारा बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर लगातार खर्च और सेवा क्षेत्र के मजबूत प्रदर्शन ने भी आर्थिक गतिविधियों को गति दी है। साथ ही निजी निवेश में सुधार की संभावनाएं आने वाले समय में विकास दर को और मजबूती दे सकती हैं।
महंगाई और तेल कीमतों पर बनी हुई है नजर
Moody’s हालांकि Moody’s ने आर्थिक वृद्धि को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण रखा है, लेकिन कुछ जोखिमों की ओर भी संकेत किया है। एजेंसी के मुताबिक, मध्य पूर्व संकट और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर महंगाई पर पड़ सकता है। वित्त वर्ष 2027 में औसत मुद्रास्फीति 4.8 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है।
इसके अलावा मौसम संबंधी चुनौतियां, खाद्य कीमतों में संभावित बढ़ोतरी, ऊर्जा आयात लागत और चालू खाता घाटे पर दबाव भी अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन सकते हैं।
राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने पर जोर
Moody’s मूडीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भारत सरकार वैश्विक चुनौतियों के बावजूद राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने का प्रयास कर रही है। सरकार बजट घाटे को नियंत्रित करने और वित्तीय संतुलन मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
एजेंसी का मानना है कि बेहतर कर संग्रह, मजबूत नाममात्र जीडीपी वृद्धि और दीर्घकालिक आर्थिक सुधारों के चलते भारत की वित्तीय स्थिति में क्रमिक सुधार देखने को मिल सकता है।
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