Report: Prem Srivastava
Jharkhand किस्मत की लकीरें जब इंसान को अपनों से दूर करती हैं, तो अक्सर यादें धुंधली पड़ जाती हैं, लेकिन चाईबासा के राजा की कहानी कुछ अलग है। करीब 14 साल पहले परिवार से बिछड़ा एक मासूम बच्चा, जो केरल के फुटबॉल मैदानों का सितारा बना, अब अपने घर वापसी के लिए तैयार है। यह केवल एक युवा की घर वापसी नहीं, बल्कि तकनीक और मानवीय संवेदनाओं की एक बड़ी जीत है।
संघर्ष से सफलता तक: फुटबॉल बना सहारा
Jharkhand राजा का सफर साल 2013 में एर्नाकुलम की चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) के साथ शुरू हुआ था। स्नेह भवन से होते हुए वह त्रिशूर के चिल्ड्रेन होम पहुंचा। घर से सैकड़ों मील दूर, भाषा और संस्कृति के बीच तालमेल बिठाते हुए राजा ने फुटबॉल को अपनी ताकत बनाया। उसकी प्रतिभा का जादू ऐसा चला कि उसने प्रसिद्ध फुटबॉल क्लब केरल ब्लास्टर्स की जूनियर टीम में अपनी जगह बना ली। खेल ने उसे न केवल पहचान दी, बल्कि अकेलेपन से लड़ने का हौसला भी दिया।
‘मिसिंग नेटवर्क’ और सोशल मीडिया का कमाल
Jharkhand राजा की घर वापसी की राह तब खुली जब उसने CWC सदस्य अशरफ ओकेएम को अपने बचपन की कुछ धुंधली यादें बताईं। इसके बाद ‘मिसिंग पर्सन्स केरल’ और ‘मिसिंग एंड फाउंड नेटवर्क’ जैसे डिजिटल मंच सक्रिय हुए। अफसर अहमद खान, फर्दीन खान और रेलवे चिल्ड्रन इंडिया के चेयरमैन हरभजन सिंह के संयुक्त प्रयासों से राजा की जानकारी झारखंड के स्थानीय सोशल मीडिया ग्रुप्स और अखबारों तक पहुँची। चाईबासा की उन धुंधली स्मृतियों को जब तकनीक का सहारा मिला, तो नामुमकिन दिखने वाली तलाश हकीकत में बदल गई।
प्रशासनिक तैयारी और खुशियों की आहट
Jharkhand वर्तमान में राजा कन्नूर के एक आफ्टर-केयर होम में है और प्रशासनिक औपचारिकताएं तेजी से पूरी की जा रही हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले 7 से 10 दिनों के भीतर वह अपने पैतृक निवास चाईबासा पहुंच जाएगा। 14 वर्षों का लंबा इंतजार अब खत्म होने को है, जिससे न केवल उसके परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू हैं, बल्कि पूरे इलाके में इस ‘जादूई मिलन’ की चर्चा हो रही है।





