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झांसी गोलीकांड: गर्लफ्रेंड को गोली मारकर खुदकुशी करने वाले युवक की कहानी — भोपाल एम्स में जिंदगी से जूझ रही कृतिका

BY: Yoganand Shrivastva

झांसी: बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी के सामने गोलीकांड में घायल छात्रा कृतिका चौबे (20 वर्ष) इस समय भोपाल एम्स में भर्ती है। तीन घंटे चले ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने उसकी रीढ़ की हड्डी में फंसी गोली निकाल दी, लेकिन उसके दोनों पैर सुन्न हैं। डॉक्टरों का कहना है कि फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि वह दोबारा चल पाएगी या नहीं।

पिता की आंखों में आंसू, बेटी ICU में
कृतिका के पिता गौरीशंकर चौबे ने बताया कि बेटी की हालत नाजुक है। उसे होश आ गया है और वह बात कर पा रही है, लेकिन शरीर का निचला हिस्सा बेजान है। डॉक्टरों का कहना है कि स्थिति धीरे-धीरे सुधर सकती है, पर अभी कुछ भी निश्चित नहीं कहा जा सकता।

झांसी से भोपाल तक चला इलाज
घटना के बाद घायल कृतिका को पहले झांसी से भोपाल एम्स लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी रीढ़ की हड्डी में धातु के छल्ले लगाए। गोली लंबे समय तक रीढ़ में फंसी रहने से संक्रमण का खतरा बढ़ गया था। फिलहाल उसे आईसीयू में रखा गया है और निगरानी जारी है।

ललितपुर की रहने वाली कृतिका और आरोपी मनीष की पहचान
कृतिका ललितपुर जिले के तालाबपुरा मोहल्ले की निवासी है। वह बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी में एमबीए प्रथम वर्ष की छात्रा थी और हॉस्टल में रहती थी। आरोपी मनीष साहू (25 वर्ष) उसी मोहल्ले का रहने वाला था। दोनों एक-दूसरे को बचपन से जानते थे और 2018 में उनका प्रेम संबंध शुरू हुआ था।

प्रेम कहानी बनी त्रासदी
मनीष ने आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी, जबकि कृतिका उच्च शिक्षा ले रही थी। यही बात दोनों के बीच मतभेद का कारण बनी। मनीष बेरोजगार था, हालांकि बाद में उसने सरकारी विभाग में कार चालक की नौकरी की, पर कृतिका इसके खिलाफ थी।
मनीष ने तीन महीने पहले अपनी पत्नी को तलाक दे दिया था। परिवार के विरोध के बावजूद वह कृतिका से शादी करना चाहता था, लेकिन कृतिका ने उससे दूरी बना ली थी।

घटना का दिन और गोलीकांड
पुलिस जांच में सामने आया कि मनीष दीपावली से पहले झांसी पहुंचा था और कई बार कृतिका से मिलने की कोशिश कर रहा था। उसने लगातार कॉल कर आखिरी बार मिलने का आग्रह किया। 9 नवंबर को यूनिवर्सिटी के सामने जब दोनों मिले, तो विवाद के बाद मनीष ने कृतिका को गोली मारी और खुद को भी गोली मार ली।

परिवार की पीड़ा और अंतिम संस्कार
मनीष की मौत के बाद उसका शव ललितपुर लाया गया। रात में गोविंद सागर बांध के पास स्थित अस्थायी श्मशान घाट पर उसका अंतिम संस्कार किया गया। पिता ने कहा — “20 साल पहले हादसे में मेरा एक हाथ चला गया था, अब मेरा बेटा भी चला गया। इससे बड़ा दुख क्या होगा।”

पुलिस की जांच और मानसिक स्थिति की पड़ताल
पुलिस को कृतिका के मोबाइल से मनीष के कई कॉल रिकॉर्ड मिले हैं। अधिकारियों के अनुसार, कृतिका ने मनीष से रिश्ता खत्म कर दिया था, लेकिन वह उसे छोड़ नहीं पा रहा था। वह डिप्रेशन में था और कई दिनों से उसके हॉस्टल के आसपास घूम रहा था।

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