संवाददाता: रतन कुमार
Jamtara जामताड़ा आरपीएफ ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए ट्रेन से तस्करी कर ले जाए जा रहे पांच नाबालिग बच्चों को सुरक्षित बचाया है। गुप्त सूचना के आधार पर की गई इस त्वरित कार्रवाई ने बाल श्रम के एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा किया है। यह रेस्क्यू ऑपरेशन साप्ताहिक बेंगलुरु एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 22306) में चलाया गया, जिससे पूरे स्टेशन परिसर में हड़कंप मच गया।
हेल्पलाइन की सूचना पर RPF ने बिछाया जाल
Jamtara इस पूरे बचाव अभियान की शुरुआत दिल्ली स्थित GRC हेल्पलाइन से मिली एक गुप्त सूचना के साथ हुई। मधुपुर की ‘आश्रय’ संस्था को जानकारी मिली थी कि बड़ी संख्या में बच्चों को अवैध रूप से मजदूरी के लिए ले जाया जा रहा है। संस्था की सदस्य दीपा कुमारी ने तुरंत मधुपुर और जामताड़ा आरपीएफ से संपर्क साधा। सूचना मिलते ही इंस्पेक्टर श्रमिक दास गुप्ता और शक्ति कुमार के नेतृत्व में आरपीएफ की टीम ने ट्रेन के जामताड़ा पहुंचते ही गहन तलाशी अभियान शुरू कर दिया।
उत्तर प्रदेश से बेंगलुरु तक बिछा था ‘दिहाड़ी मजदूरी’ का जाल
Jamtara प्रारंभिक सूचना में ट्रेन में करीब 25 बच्चों के होने की आशंका जताई गई थी, लेकिन जांच के दौरान आरपीएफ ने 5 नाबालिग बच्चों को चिन्हित कर सुरक्षित उतार लिया। पूछताछ में पता चला कि ये सभी बच्चे उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विभिन्न प्रखंडों के निवासी हैं। बच्चों ने खुलासा किया कि उन्हें जसीडीह स्टेशन से ट्रेन में बैठाया गया था और बेंगलुरु की ‘चुलाई’ नामक कंपनी में दिहाड़ी मजदूरी कराने के बहाने ले जाया जा रहा था।
बाल कल्याण समिति के संरक्षण में भेजे गए बच्चे
Jamtara आरपीएफ ने रेस्क्यू किए गए सभी बच्चों को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर इसकी सूचना जिला बाल कल्याण समिति (CWC) को दी। वर्तमान में सभी पांचों बच्चे समिति के संरक्षण में हैं, जहाँ उनकी काउंसलिंग की जा रही है और उनके परिजनों से संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है। इस सफल ऑपरेशन में चाइल्ड हेल्पलाइन के सदस्यों और आरपीएफ के जवानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस अब उन एजेंटों की तलाश कर रही है जो इन मासूमों को बहला-फुसलाकर ले जा रहे थे।
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