concept: r p shrivastava, by: vijay nandan
बिहार के चुनावी महासंग्राम में आज पहले चरण का मतदान हो रहा है। आज से दूसरे चरण के मतदान के लिए एनडीए का धुआंधार प्रचार जारी है। लेकिन पहले चरण के चुनाव प्रचार के दौरान एनडीए में कई ऐसे संकेत सामने आए जिससे राजनीतिक पंडितों को सोचने पर मजबूर दिया है। पहले चरण के चुनाव प्रचार में बीजेपी के शीर्ष नेता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करीब एक दर्जन रैलियां और रोड शो किए। हाल ही में पटना में हुए रोड शो में भी पीएम मोदी का जबरदस्त शक्ति प्रदर्शन देखने को मिला। लेकिन इस रोड शो में जेडीयू के सबसे बड़े नेता और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नज़र नहीं आए। पीएम मोदी के साथ रोड शो के रथ पर जेडीयू की ओर से केंद्रीय मंत्री ललन सिंह मौजूद जरूर थे, लेकिन उनके हावभाव बता रहे थे कि वे पीएम मोदी के साथ कुछ असहज महसूस कर रहे हैं। रथ पर सवार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल चेहरे पर हल्की मुस्कान लिए नजर आए, जबकि ललन सिंह के भाव बता रहे थे कि वे रथ पर बेमन से खड़े हैं। अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या जेडीयू और बीजेपी के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा? क्योंकि चुनावी मंचों पर एक साथ नजर न आने से सियासी सवाल उठना तो लाजमी है।

सवाल बड़ा मजेदार है दोस्तों…एनडीए के सीएम फेस नीतीश बाबू आखिर पीएम मोदी के रोड शो में नज़र क्यों नहीं आए? क्या तबीयत नासाज़ थी या राजनीति के मिज़ाज बिगड़े हुए थे? क्योंकि ये कोई इत्तेफाक नहीं..ये तो बिहार की राजनीति का नया सियासी इशारा है भाई साहब!
- 2 नवंबर को आरा में रैली… नीतीश नहीं!
- 3 नवंबर सहरसा में सभा… वहाँ भी नहीं!
- कटिहार की जनसभा में भी वही कहानी
- मंच पर मोदी अकेले, और नीतीश जी की अनुपस्थिति की नई कहानी !
अब गलियारों में गूंज है..क्या एनडीए के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा? क्या बीजेपी और जेडीयू के रिश्तों की डोर फिर ढीली पड़ रही है? या फिर मिस्टर पलटूराम नीतीश कुमार कुछ नया तानाबाना बुन रहे हैं? कहते हैं नीतीश हैं पुराने समाजवादी, नफा-नुकसान का जोड़ घटाना में उन्हें महारत है. “मैं नहीं तो तू भी नहीं” यही इनका फॉर्मूला, और राजनीति में यही बनता है इनका खूबसूरत खेल-खेला! कहीं ऐसा तो नहीं कि नीतीश बाबू ने एकनाथ शिंदे की कहानी से सबक लिया है? और पहले से ही स्क्रिप्ट लिख ली है नई, कि चुनाव से पहले फिर पलटी मारे ये भाई ! उधर, आर.के. सिंह का 62 हज़ार करोड़ वाला बिजली घोटाला तीर, नीतीश सरकार की तरफ उड़ चला है गंभीर! इधर बीजेपी के 16 बागी अलग राग छेड़े हुए हैं, मतलब भीतर भीतर कई सुर बिखरे हुए हैं। तो जनाब, खेल बड़ा गहरा है, चेहरे पर मुस्कान है, पर अंदर सियासी सिहरन है! कहावत है “नीतीश जहाँ खड़े हों, वहाँ कहानी पलटनी तय है! और सुनिए…अब सबकी नज़र 14 नवंबर पर है टिकी, क्योंकि बिहार की सियासत में पलटूराम की अगली चाल वहीं से झलकेगी! तो साहब, राजनीति के इस खेल में कौन बनेगा फिर किंग और कौन खाता रहेगा खाजा, ये तो वक्त ही बताएगा…पर फिलहाल, नीतीश बाबू फिर सुर्खियों के “सेंटर पॉइंट” हैं और बिहार की राजनीति, फिर दिलचस्प मोड़ पर स्टैंडबाय है!




