Apple का अगला फ्लैगशिप स्मार्टफोन iPhone 17 अब भारत में मैन्युफैक्चर होने जा रहा है। इसके लिए Apple के प्रमुख सप्लायर Foxconn ने चीन से जरूरी कंपोनेंट्स भारत भेज दिए हैं। जुलाई 2025 से iPhone 17 का ट्रायल प्रोडक्शन भारत में शुरू होगा, जबकि मास प्रोडक्शन अगस्त से संभावित है।
यह कदम भारत की टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को ग्लोबल स्तर पर एक नई पहचान देने वाला है।
कौन-कौन से पार्ट्स भेजे गए हैं भारत?
कस्टम डेटा के अनुसार, Foxconn ने जून 2025 में iPhone 17 के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स भारत भेजे:
- डिस्प्ले असेंबली
- कवर ग्लास
- मैकेनिकल हाउसिंग
- इंटीग्रेटेड रियर कैमरा मॉड्यूल
इनमें से लगभग 10% कंपोनेंट्स सीधे iPhone 17 से जुड़े हैं, जबकि बाकी पार्ट्स iPhone 16 और iPhone 14 के लिए हैं, जिन्हें आगामी फेस्टिव सीजन में भारत में बेचा जाएगा।
ट्रायल प्रोडक्शन जुलाई से, अगस्त में मास प्रोडक्शन
- जुलाई 2025: iPhone 17 का ट्रायल प्रोडक्शन भारत में शुरू होगा।
- अगस्त 2025: बड़े स्तर पर उत्पादन यानी मास प्रोडक्शन शुरू होगा।
- सितंबर 2025: iPhone 17 का ग्लोबल लॉन्च संभावित है।
iPhone 17 की मैन्युफैक्चरिंग पहली बार भारत और चीन में एक साथ शुरू की जा रही है। यह भारत के लिए मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में एक बड़ी उपलब्धि है।
अमेरिका में भारत से होंगे iPhone सप्लाई
- अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव के कारण, Apple अब भारत को एक बड़े एक्सपोर्ट हब की तरह विकसित कर रहा है।
- मार्च 2025 में भारत से अमेरिका भेजे गए iPhones की संख्या में 219% की ग्रोथ दर्ज की गई।
- Apple की योजना है कि 2026 तक अमेरिका में बेचे जाने वाले iPhones भारत से ही सप्लाई किए जाएं।
भारत-चीन प्रोडक्शन गैप हो रहा कम
- iPhone 14 की असेंबली भारत में चीन के मुकाबले 6 हफ्ते बाद शुरू हुई थी।
- iPhone 15 की असेंबली लगभग एक साथ दोनों देशों में शुरू हुई।
- iPhone 16 में भारत ने पहली बार Apple के New Product Introduction (NPI) प्रोसेस में भाग लिया।
अब iPhone 17 के लिए भी यही प्रोसेस अपनाया जा रहा है, जिससे भारत की तकनीकी भागीदारी और मजबूत होगी।
भारत बना ग्लोबल प्रोडक्शन चेन का अहम हिस्सा
Apple द्वारा भारत में iPhone 17 का ट्रायल प्रोडक्शन शुरू करना यह संकेत देता है कि भारत अब केवल एक मार्केट नहीं, बल्कि ग्लोबल प्रोडक्शन चेन का मजबूत हिस्सा बन चुका है।
यह बदलाव भारत के लिए न सिर्फ रोजगार और तकनीकी विकास के नए रास्ते खोलेगा, बल्कि देश को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग मैप पर एक नई ऊंचाई भी देगा।





