BY: VIJAY NANDAN
भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर की गई सर्जिकल कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद अब वैश्विक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। सबसे पहले प्रतिक्रिया देने वालों में चीन शामिल है, जिसने इस कार्रवाई को लेकर चिंता ज़ाहिर की है।
चीन का बयान: कार्रवाई पर खेद, बातचीत की अपील
चीन ने भारत द्वारा पाकिस्तान में किए गए सैन्य अभियान पर अप्रसन्नता जताई है। बीजिंग से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ता तनाव चिंताजनक है। चीन ने भारत की कार्रवाई को “खेदजनक” बताते हुए कहा कि मौजूदा हालात किसी भी क्षेत्रीय अस्थिरता को जन्म दे सकते हैं।

“भारत और पाकिस्तान न केवल पड़ोसी हैं, बल्कि हमेशा पड़ोसी रहेंगे। ऐसे में दोनों देशों को संयम बरतना चाहिए और बातचीत के ज़रिए मुद्दों का समाधान निकालना चाहिए।”
संयुक्त राष्ट्र
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भारत और पाकिस्तान से सैन्य संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि वैश्विक शांति के लिए यह ज़रूरी है कि दोनों देश किसी भी सैन्य टकराव से बचें और कूटनीतिक समाधान की राह अपनाएं।
फ्रांस
फ्रांस ने दोनों देशों से संयम बरतने और बातचीत के ज़रिए तनाव कम करने का आग्रह किया है। फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान को क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए जिम्मेदारी से काम करना चाहिए।
ब्रिटेन
ब्रिटेन ने स्थिति पर गंभीरता से नजर रखने की बात कही है और भारत-पाकिस्तान दोनों से संयम की अपील की है। ब्रिटिश सरकार ने उम्मीद जताई है कि दोनों पक्ष तनाव को बढ़ने से रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद कतर, अफगानिस्तान, यूएई, इटली, नेपाल और श्रीलंका की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, क्षेत्रीय स्थिरता और शांति बनाए रखने के लिए इन देशों की चिंताएं स्वाभाविक हैं।
इस बीच, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के प्रभाव से अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात प्रभावित हुआ है। कई प्रमुख एयरलाइनों, जैसे कि कतर एयरवेज, श्रीलंकन एयरलाइंस और नेपाल एयरलाइंस ने दक्षिण एशिया के ऊपर अपने उड़ान मार्गों में बदलाव किया है। यह कदम सुरक्षा कारणों से उठाया गया है, जिससे क्षेत्रीय हवाई यातायात पर असर पड़ा है।
नेपाल के एक नागरिक की पहलगाम हमले में मृत्यु के बाद, नेपाल सरकार ने इस घटना पर चिंता व्यक्त की है और अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं।
श्रीलंका और अफगानिस्तान की सरकारों ने अभी तक कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए दोनों देशों की चिंताएं समझी जा सकती हैं।
इटली की सरकार ने भी इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के रूप में, वे क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के महत्व को समझते हैं।
इस स्थिति में, अंतरराष्ट्रीय समुदाय से संयम और संवाद की अपील की जा रही है ताकि क्षेत्र में तनाव को कम किया जा सके और स्थायी शांति सुनिश्चित की जा सके।
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