BY: Yoganand Shrivastva
इंदौर: जिला अदालत ने 14 वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या के मामले में सगे मौसा को दोषी करार देते हुए कठोर रुख अपनाया है। कोर्ट ने शुक्रवार (28 नवंबर) को तीन अलग-अलग धाराओं के तहत उसे तीन बार आजीवन कारावास और 30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अदालत ने टिप्पणी की कि आरोपी ने रिश्ते की आड़ लेकर अत्यंत घृणित अपराध को अंजाम दिया है, जो उसकी विकृत मानसिकता को दर्शाता है। ऐसे मामलों में हल्की सजा न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ होगी।
कैसे हुआ था अपराध
21 जून 2022 को पीड़िता के परिवार के सभी सदस्य घर से बाहर थे। मां अपनी दोनों बेटियों को साथ लेकर काम पर गई थी और पिता नौकरी के कारण शहर से बाहर थे। जब शाम को मां लौटकर आई तो बेटी घर से गायब थी, जबकि बगल के कमरे—जहां मौसा रहता था—का दरवाजा अंदर से बंद था। आवाज न आने पर दरवाजा तोड़ा गया, जहां नाबालिग का शव खून से सना मिला। आरोपी मौसा भी कमरे में घायल अवस्था में पड़ा था।
पोस्टमॉर्टम में गले, चेहरे, पेट और निजी अंगों पर गंभीर चोटें मिलीं। फोरेंसिक टीम ने कमरे से खून के नमूने, चाकू, ब्लेड और साड़ी का टुकड़ा जब्त किया। दोनों दरवाजे अंदर से बंद पाए गए। जांच में स्पष्ट हुआ कि आरोपी ने पहले दुष्कर्म किया, फिर हत्या की और बाद में खुद को घायल करके गुमराह करने की कोशिश की।
गवाही कमजोर, पर साक्ष्य मजबूत
सुनवाई के दौरान पीड़िता के माता-पिता और कुछ गवाह मुकर गए, लेकिन फोरेंसिक रिपोर्ट, पोस्टमॉर्टम, घटनास्थल पर मिले वैज्ञानिक साक्ष्य और परिस्थितिजन्य प्रमाण इतने मजबूत रहे कि कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराया।
कोर्ट ने किन धाराओं में सजा दी
आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा—
- 376-ए
- 376 (2)(च)
- 302
के तहत तीन बार अलग-अलग उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
अभियोजन की ओर से प्रीति अग्रवाल, सुशीला राठौर और अविसारिका जैन (ADPO) ने पैरवी की। अदालत ने पीड़िता के माता-पिता के लिए 3 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की भी अनुशंसा की।कोर्ट ने कहा कि यह मामला साफ दर्शाता है कि महिलाएं और बच्चियां केवल बाहर ही नहीं, बल्कि अपने ही घरों और रिश्तेदारों के बीच भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं।





