रिपोर्ट: देवेन्द्र जायसवाल
Indore इंदौर के नवलखा से एलआईजी चौराहे तक प्रस्तावित एलिवेटेड ब्रिज कॉरिडोर के भविष्य पर संशय के बादल मंडराने लगे हैं। शुक्रवार को रेसीडेंसी कोठी में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और स्थानीय विधायकों सहित तकनीकी विशेषज्ञों ने इस प्रोजेक्ट की उपयोगिता पर गंभीर सवाल उठाए।

तकनीकी खामियां और सर्वे पर उठे सवाल
Indore बैठक के दौरान एक्रोपोलिस कॉलेज द्वारा किए गए सर्वे और ब्रिज की प्रस्तावित 25 फीट की ऊंचाई को लेकर कड़ा विरोध जताया गया। आईआईटी (IIT) एक्सपर्ट अंशुल अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि ब्रिज के बीच में ‘आर्म’ या भुजा बनाने से ट्रैफिक की रफ्तार सुस्त होगी, जिससे जाम की स्थिति और बिगड़ सकती है। जनप्रतिनिधियों ने पीडब्ल्यूडी (PWD) के 2019 के पुराने सर्वे को वर्तमान जरूरतों के लिहाज से अप्रासंगिक बताते हुए सुझाव दिया कि पूरे कॉरिडोर के बजाय प्रत्येक चौराहे पर अलग-अलग ब्रिज या बेहतर ट्रैफिक मॉड्यूल का निर्माण किया जाना चाहिए।
मेट्रो प्रोजेक्ट और बजट की चुनौतियां
Indore मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के अधिकारियों ने एक बड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि एबी रोड पर यह एलिवेटेड ब्रिज बनता है, तो भविष्य में इस मार्ग पर मेट्रो लाइन बिछाना तकनीकी रूप से लगभग असंभव हो जाएगा। साथ ही, नगर निगम ने जानकारी दी कि जमीन के नीचे दबी यूटिलिटी लाइनों को शिफ्ट करने में ही करीब 10 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ आएगा। लागत को लेकर भी खींचतान दिखी; जहाँ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने 300 करोड़ के शुरुआती बजट पर सवाल किए, वहीं PWD ने इसे 370 करोड़ रुपये में पूर्ण करने का दावा किया है।
भविष्य की योजना और अंतिम निर्णय
Indore वरिष्ठ नेता सुमित्रा महाजन ने बैठक में दूरगामी सोच पर जोर देते हुए कहा कि शहर की प्लानिंग अगले 25 से 40 वर्षों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर ‘सिग्नल-लेस’ होनी चाहिए। इस गहन चर्चा के बाद, अब गेंद विशेषज्ञों के पाले में है। सभी संबंधित एक्सपर्ट्स अगले आठ दिनों में अपनी विस्तृत रिपोर्ट कमिश्नर सुदाम खाड़े को सौंपेंगे, जिसके आधार पर इस प्रोजेक्ट के भाग्य का अंतिम फैसला लिया जाएगा।
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