India-US Tariff: अमेरिका और भारत के बीच रूस से कच्चे तेल की खरीद और संभावित 100 फीसदी टैरिफ को लेकर जारी चर्चा के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति के काउंसलर पीटर नवारो ने दोनों देशों के रिश्तों को लेकर बड़ा बयान दिया है। नवारो ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच अच्छे कामकाजी संबंध हैं और दोनों नेता व्यापार से जुड़े मुद्दों को बातचीत के जरिए सुलझा सकते हैं।
नवारो से अमेरिकी सीनेट में पारित लिंडसे ग्राहम बिल और भारत पर संभावित 100 फीसदी टैरिफ के असर को लेकर सवाल किया गया था। इसके जवाब में उन्होंने संकेत दिया कि इस मामले में ट्रंप और मोदी के बीच सीधे संवाद की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
India-US Tariff: ट्रंप और मोदी खुद सुलझाएंगे व्यापार का मुद्दा
पीटर नवारो ने कहा कि इस विषय पर अमेरिकी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मोदी के बीच बातचीत होनी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह दोनों नेताओं के बीच आने की कोशिश नहीं करेंगे और इस मामले को ट्रंप तथा मोदी को आपस में सुलझाने देना चाहिए।
#WATCH | Washington, DC (US): "…With respect to your question, the President and your Prime Minister have a very good working relationship. They are going to work that out amongst themselves, and it's not for me to get between that…," says U.S. presidential counselor Peter… pic.twitter.com/zClGwhXOTT
— ANI (@ANI) August 12, 2026
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान नवारो ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच कामकाजी संबंध अच्छे हैं। ऐसे में व्यापार और टैरिफ से जुड़े मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने की संभावना बनी हुई है।
India-US Tariff: रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर अमेरिकी नजर
भारत पर संभावित 100 फीसदी टैरिफ का मुद्दा रूस से कच्चे तेल की खरीद से जुड़ा है। अमेरिका का तर्क है कि रूस से तेल और गैस खरीदने से वहां की अर्थव्यवस्था को आय मिलती है, जिसका इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध से जुड़े खर्चों में किया जा सकता है।
नवारो ने अपने पुराने लेख का हवाला देते हुए भारत और रूस के ऊर्जा व्यापार पर भी टिप्पणी की। उनका कहना था कि यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के समय भारत का रूस के साथ तेल कारोबार मौजूदा स्तर पर नहीं था, लेकिन बाद में इसमें काफी बढ़ोतरी हुई।
India-US Tariff: नवारो ने भारतीयों की आलोचना का भी किया जिक्र
पीटर नवारो ने कहा कि रूस के साथ भारत के तेल व्यापार पर लिखे गए उनके लेख के बाद उन्हें इंटरनेट पर भारतीय यूजर्स की ओर से काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था।
उन्होंने इस प्रतिक्रिया का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका में समस्याओं का समाधान इस तरह नहीं किया जाता। उनके बयान से संकेत मिलता है कि भारत के साथ व्यापार और रूस से ऊर्जा खरीद का मुद्दा अमेरिकी प्रशासन के लिए अभी भी महत्वपूर्ण है।
India-US Tariff: 7 अगस्त को अमेरिकी सीनेट में पास हुआ बिल
रूस से जुड़े प्रतिबंधों को लेकर अमेरिकी सीनेट ने 7 अगस्त को एक महत्वपूर्ण विधेयक पारित किया था। इस प्रस्ताव में अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले कुछ बड़े देशों पर 100 फीसदी तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार देने की बात कही गई है।
भारत और चीन समेत कुछ प्रमुख ऊर्जा खरीदार इस प्रस्ताव के संभावित दायरे में बताए गए हैं। अमेरिका का उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय पर दबाव बढ़ाना और यूक्रेन में जारी युद्ध के लिए मिलने वाले आर्थिक संसाधनों को सीमित करना है।
India-US Tariff: 86-11 वोट से सीनेट में पारित हुआ बिल
अमेरिकी सीनेट में इस विधेयक को 86 के मुकाबले 11 वोटों से मंजूरी मिली। प्रस्ताव के समर्थकों का तर्क है कि रूस से तेल, गैस और अन्य सामान खरीदने वाले देशों पर आर्थिक दबाव डालने से रूसी अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा।
यह विधेयक रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर दबाव बढ़ाने और यूक्रेन के लिए अमेरिकी समर्थन को मजबूत करने की व्यापक कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है।
India-US Tariff: लिंडसे ग्राहम के नाम पर है विधेयक
इस प्रस्ताव का संबंध दिवंगत अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम की ओर से रूस के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों की पैरवी से जुड़ा है। उन्होंने लंबे समय तक रूस पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव बढ़ाने की वकालत की थी।
विधेयक में रूस से ऊर्जा और अन्य सामान खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की व्यवस्था का उद्देश्य मॉस्को की आय को प्रभावित करना बताया गया है। हालांकि इसके आगे लागू होने की प्रक्रिया और अंतिम प्रावधान महत्वपूर्ण होंगे।
India-US Tariff: भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के लिए अहम मामला
भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एक तरफ अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों को आगे बढ़ाने की कोशिश चल रही है, वहीं दूसरी तरफ रूस भारत के प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है।
यदि अमेरिका भारत पर प्रस्तावित अतिरिक्त टैरिफ लागू करता है तो दोनों देशों के व्यापार पर असर पड़ सकता है। ऐसे में ट्रंप और मोदी के बीच होने वाली बातचीत इस पूरे मामले की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
India-US Tariff: टैरिफ विवाद के बीच बातचीत पर टिकी निगाहें
पीटर नवारो के बयान से यह संकेत मिला है कि अमेरिकी प्रशासन भारत के साथ व्यापारिक मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने की संभावना को खुला रखना चाहता है। उन्होंने दोनों नेताओं के बीच अच्छे कामकाजी संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मुद्दे को ट्रंप और मोदी को स्वयं सुलझाने देना चाहिए।
अब निगाहें आगे की अमेरिकी विधायी प्रक्रिया और भारत-अमेरिका के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर हैं। खास तौर पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रूस से तेल खरीद और प्रस्तावित टैरिफ को लेकर दोनों पक्ष किस तरह का समाधान निकालते हैं।
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