Ranchi Printing: खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में कक्षा पहली से सातवीं तक की लोकल परीक्षा के प्रश्नपत्रों और उत्तर पुस्तिकाओं की छपाई को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। Ranchi Printing से जुड़े RTI से प्राप्त दस्तावेजों के मुताबिक इन परीक्षा सामग्रियों की छपाई छत्तीसगढ़ में नहीं, बल्कि झारखंड की राजधानी रांची में कराई गई।
Ranchi Printing: दस्तावेजों में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय खैरागढ़ की ओर से रांची स्थित National Printers, Namkum Industrial Area, Ranchi से प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिकाएं छपवाए जाने की जानकारी सामने आती है। उपलब्ध बिलों के मुताबिक इस पूरी प्रक्रिया में करीब 10 लाख रुपये के भुगतान का विवरण सामने आया है।
Ranchi Printing: दो बिलों में करीब 10 लाख रुपये के भुगतान का विवरण
Ranchi Printing: RTI से मिले दस्तावेजों के अनुसार 12 मार्च 2026 के एक बिल में कक्षा 1, 2, 3, 4, 6 और 7 की परीक्षा सामग्री की कुल 25,019 नग छपाई का उल्लेख है। इसके लिए करीब 6 लाख 25 हजार रुपये की राशि का बिल सामने आया है।
Ranchi Printing: वहीं 24 जुलाई 2026 के दूसरे बिल में कक्षा 5वीं की 14,084 नग परीक्षा सामग्री की छपाई का विवरण दर्ज है। इसके लिए करीब 3 लाख 51 हजार रुपये के भुगतान का उल्लेख है।
Ranchi Printing: इन दोनों उपलब्ध बिलों को जोड़ने पर संबंधित छपाई कार्यों के लिए करीब 9.76 लाख रुपये की राशि सामने आती है। हालांकि, भुगतान की पूरी प्रक्रिया, स्वीकृति और संबंधित दस्तावेजों की वैधता की पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही हो सकेगी।
Ranchi Printing: कोटेशन के लिए तीन फर्मों से किया गया था संपर्क
Ranchi Printing: RTI से मिले पत्रों में 28 जनवरी 2026 को कोटेशन के लिए जिन फर्मों से संपर्क किए जाने की जानकारी है, उनमें Setu Printers, National Printers और Jharkhand Printers Pvt. Ltd. के नाम शामिल हैं।
Ranchi Printing: उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक तीनों फर्म झारखंड की बताई गई हैं। ऐसे में अब सवाल यह उठ रहा है कि खैरागढ़ जिले की प्राथमिक कक्षाओं की परीक्षा सामग्री के लिए स्थानीय या छत्तीसगढ़ की प्रिंटिंग एजेंसियों को विकल्प के तौर पर क्यों नहीं शामिल किया गया।
Ranchi Printing: रायपुर में सुविधाएं होने के बावजूद रांची से छपाई क्यों?
Ranchi Printing: खैरागढ़ से रांची की दूरी करीब 500 किलोमीटर के आसपास है। ऐसे में RTI दस्तावेज सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में प्रिंटिंग की सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद परीक्षा प्रश्नपत्रों की छपाई रांची से कराने का निर्णय क्यों लिया गया।
Ranchi Printing: इसके साथ ही अलग-अलग फर्मों की ओर से दिए गए कोटेशन में दरों के अंतर को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि केवल कोटेशन में दरों के अंतर या किसी एक स्थान से छपाई होने के आधार पर अनियमितता, मिलीभगत या भ्रष्टाचार का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इसके लिए संबंधित विभाग के रिकॉर्ड और खरीद प्रक्रिया की जांच जरूरी है।
Ranchi Printing: प्रक्रिया में किन नियमों का पालन हुआ, यह जांच का विषय
Ranchi Printing: RTI दस्तावेजों से सामने आए सवालों का केंद्र अब पूरी खरीद और प्रिंटिंग प्रक्रिया बन गई है। विभाग को यह स्पष्ट करना होगा कि संबंधित फर्मों का चयन किस आधार पर किया गया, कितने कोटेशन प्राप्त हुए और किस फर्म की दर को स्वीकार किया गया।
Ranchi Printing: इसके अलावा यह भी देखा जाना जरूरी है कि प्रश्नपत्रों की छपाई से संबंधित गोपनीयता, टेंडर या कोटेशन प्रक्रिया, कार्यादेश और भुगतान के लिए निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं। इन सभी बिंदुओं की जानकारी संबंधित दस्तावेजों की जांच से ही स्पष्ट हो सकेगी।
Ranchi Printing: अब विभागीय जांच से साफ होगी पूरी तस्वीर
Ranchi Printing: RTI से मिले दस्तावेजों ने खैरागढ़ जिले में प्राथमिक कक्षाओं की परीक्षा सामग्री की छपाई व्यवस्था को लेकर कई सवाल जरूर खड़े किए हैं। करीब 500 किलोमीटर दूर रांची से प्रश्नपत्र छपवाने के पीछे क्या प्रशासनिक या तकनीकी कारण था, इसका जवाब शिक्षा विभाग से अपेक्षित है।
Ranchi Printing: वहीं जिला शिक्षा अधिकारी उपेंद्र देवांगन का पक्ष भी इस मामले में महत्वपूर्ण है। विभाग की ओर से दी जाने वाली जानकारी से यह स्पष्ट हो सकेगा कि रांची की फर्मों का चयन किस प्रक्रिया के तहत हुआ और उपलब्ध बजट एवं नियमों के अनुसार भुगतान को किस आधार पर मंजूरी दी गई।
Ranchi Printing: फिलहाल सामने आए तथ्य RTI दस्तावेजों, बिलों और भुगतान से संबंधित जानकारी पर आधारित हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर किसी तरह की गड़बड़ी का अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। अब विभागीय जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि पूरी प्रक्रिया में शासन के निर्धारित नियमों का पालन हुआ था या नहीं।


