भारत बनेगा रेयर अर्थ मैग्नेट का नया केंद्र, आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए सरकार की 7300 करोड़ की बड़ी पहल

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भारत बनेगा रेयर अर्थ मैग्नेट का नया केंद्र, आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए सरकार की 7300 करोड़ की बड़ी पहल

केंद्र सरकार ने रेयर अर्थ मैग्नेट के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 7,280 करोड़ रुपये की नई स्कीम को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद भारत अगले तीन से चार साल में इस महत्वपूर्ण मैटेरियल के मामले में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा। अभी देश का बड़ा हिस्सा चीन से आयात पर निर्भर है, लेकिन यह स्कीम भारत को इस क्षेत्र में मजबूत बनाएगी।

क्यों महत्वपूर्ण है यह स्कीम

देश में लगेंगी पांच बड़ी यूनिटें

सरकार के नए फैसले के तहत देश में पांच बड़े रेयर अर्थ मैग्नेट प्लांट लगाए जाएंगे।
हर यूनिट की क्षमता होगी – 1,200 टन प्रति वर्ष
इन पांचों यूनिटों से कुल उत्पादन – 6,000 टन सालाना

यह उत्पादन देश की कुल सालाना जरूरत (5,000–6,000 टन) को पूरा कर देगा।

चीन पर निर्भरता कम होगी

इस वर्ष की शुरुआत में चीन ने अमेरिका के साथ–साथ भारत को भी रेयर अर्थ मैग्नेट की सप्लाई सीमित कर दी थी। बातचीत के बाद सप्लाई बहाल हुई, लेकिन इस घटना ने भारत को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से कदम उठाने के लिए प्रेरित किया।

कैसे होगा उत्पादन

रेयर अर्थ तत्व समुद्र किनारे की रेत और पहाड़ी इलाकों की मिट्टी में पाए जाते हैं।
समुद्री रेत से मिलने वाले तत्व हल्के होते हैं, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों के तत्व भारी। दोनों को मिलाकर मैग्नेट बनाए जाते हैं।

कंपनियों की बढ़ती रुचि

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भारत की सरकारी कंपनी IREL (इंडियन रेयर अर्थ लिमिटेड) पहले से उत्पादन करती है, लेकिन सीमित मात्रा में।
अब वैश्विक कंपनियां भी भारत के साथ समझौता करने की इच्छुक हैं:
जैसे

  • ऑस्ट्रेलिया की लाइनस
  • यूके की रेनबो

ये कंपनियां मैग्नेट निर्माण के लिए जरूरी ऑक्साइड सप्लाई करने को तैयार हैं।

21,000 करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद

इस 7,280 करोड़ की सरकारी सहायता से उद्योग में कुल 21,000 करोड़ रुपये तक के निजी निवेश की संभावना है। भारी उद्योग मंत्रालय इस पूरी परियोजना को संचालित करेगा।

रेल परियोजनाओं को भी मंजूरी

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कैबिनेट ने रेल संरचना बढ़ाने के लिए दो परियोजनाओं को मंजूरी दी:

  • द्वारका–कानालुस रेल लाइन का दोहरीकरण
    • तीर्थयात्रियों को फायदा,
    • कोयला, नमक, सीमेंट जैसे माल ढुलाई में 18 मिलियन टन प्रति वर्ष की क्षमता बढ़ेगी।
  • मुंबई के बदलापुर–कर्जत के बीच तीसरी और चौथी लाइन
    • उपनगरीय रेल सेवा बेहतर होगी,
    • दक्षिण भारत की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।

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