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भारत-पाकिस्तान DGMO बैठक: कौन हैं ये अधिकारी और क्यों है इनकी भूमिका अहम?

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डीजीएमओ क्या है

BY: VIJAY NANDAN

हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की सैन्य कार्रवाई के जवाब में पाकिस्तान ने सीजफायर का प्रस्ताव रखा, जिसे भारत ने अपनी शर्तों पर मंजूरी दी। इसके तहत दोनों देशों के DGMO (Director General of Military Operations) स्तर पर बातचीत हो रही है। लेकिन आखिर DGMO होते कौन हैं? और इनकी भूमिका भारत-पाक रिश्तों में कितनी अहम है? आइए समझते हैं।


DGMO कौन होते हैं?

DGMO यानी Director General of Military Operations — ये भारतीय थल सेना में एक अहम पद होता है। इस अधिकारी की जिम्मेदारी होती है:

  • सभी सैन्य अभियानों की योजना बनाना और उसे लागू कराना
  • युद्धकालीन निर्णयों, आतंकवाद-रोधी अभियानों और शांति मिशनों की रणनीति तय करना
  • सरकार और सेना के विभिन्न अंगों के बीच संपर्क और समन्वय बनाए रखना
  • भारत-पाकिस्तान सीमा जैसे संवेदनशील इलाकों में सीधा संवाद स्थापित करना

भारत के वर्तमान DGMO कौन हैं?

लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई भारत के वर्तमान DGMO हैं। उन्होंने 25 अक्टूबर 2024 को इस पद की जिम्मेदारी संभाली।

उनके बारे में कुछ मुख्य बातें:

  • भारतीय सैन्य अकादमी (IMA), देहरादून के पूर्व छात्र
  • 1989 में कुमाऊं रेजिमेंट में शामिल हुए
  • इससे पहले 15वीं कोर (चिनार कोर) के GOC (General Officer Commanding) थे
  • LOC की सुरक्षा और आतंकी नेटवर्क तोड़ने में अहम भूमिका निभा चुके हैं

DGMO के रूप में वे भारतीय सेना को हर परिस्थिति के लिए तैयार रखते हैं और विभिन्न मंत्रालयों के साथ गहन समन्वय करते हैं।


पाकिस्तान के DGMO कौन हैं?

मेजर जनरल काशिफ अब्दुल्ला चौधरी नवंबर 2023 में पाकिस्तान के DGMO बनाए गए।

उनके कार्यक्षेत्र में शामिल है:

  • नियंत्रण रेखा (LoC) और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सैन्य निर्णयों की निगरानी
  • भारत के साथ सीजफायर वार्ता करना
  • सीमा पर होने वाली गोलीबारी और घुसपैठ की रणनीतिक जिम्मेदारी उठाना

बताया जा रहा है कि सीजफायर की पहल पाकिस्तान की ओर से मेजर जनरल काशिफ ने ही की थी। हालांकि, सीजफायर की सहमति के कुछ ही घंटों बाद पाकिस्तान ने इसका उल्लंघन कर दिया, जिससे उसकी मंशा पर सवाल उठने लगे हैं।


DGMO बातचीत क्यों है अहम?

भारत और पाकिस्तान के बीच जब भी सीमा पर तनाव बढ़ता है, तब DGMO स्तर पर सीधी बातचीत दोनों देशों के लिए एक डिप्लोमैटिक सेफ्टी वाल्व की तरह काम करती है। ये बातचीत युद्ध से बचाव और शांति की दिशा में पहला कदम मानी जाती है।

इस बार भी DGMO बातचीत के ज़रिए:

  • भारत ने स्पष्ट किया है कि सीजफायर का पालन भारत की शर्तों पर ही होगा
  • किसी भी उल्लंघन की स्थिति में माकूल जवाब दिया जाएगा
  • बातचीत के जरिए आतंक और शांति—दोनों के प्रति नीति स्पष्ट रखी गई है

DGMO बातचीत का भविष्य और भारत की रणनीति

भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वो शांति का पक्षधर जरूर है, लेकिन कमजोरी नहीं। DGMO स्तर की बातचीत भविष्य में तभी कारगर होगी जब:

  • पाकिस्तान वास्तविक प्रतिबद्धता दिखाए
  • सीमा पर गतिविधियों पर पारदर्शिता रखी जाए
  • आतंकी गतिविधियों पर रोक लगे

सैन्य संवाद बनाम विश्वासघात

DGMO स्तर की बातचीत चाहे जितनी भी अहम हो, लेकिन पाकिस्तान की पुरानी रणनीति “बातचीत करो और पीछे से वार करो” को देखते हुए भारत सतर्क है। DGMO जैसे उच्च सैन्य अधिकारी जब रणनीतिक स्तर पर जुड़ते हैं, तो वो सिर्फ दो देशों की सीमाओं की बात नहीं होती — वो भविष्य की स्थिरता और संघर्ष से शांति तक की दिशा तय करते हैं।

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