Himachal Pradesh: शिमला को अशांत करने की साजिश! संजौली मस्जिद को लेकर अचनाक इतना हंगामा क्यों बरपा ? जानिए इस आर्टिकल के जरिए

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पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश इन दिनों खबरों में बना हुआ है। राजधानी शिमला के संजौली में एक मस्जिद को लेकर बवाल मचा हुआ है। जिसकी गूंज अब पूरे देश में सुनाई दे रही है।

दरअसल, शिमला में बनी संजौली मस्जिद को हिंदू संगठन अवैध बता रहे हैं। उनकी मांग है कि इसे गिराया जाए। बुधवार (11 सितंबर 2024) को हिंदू संगठनों ने कथित अवैध निर्माण के खिलाफ मस्जिद की चौखट तक मार्च निकाला ताकि अवैध निर्माण को हटाया जा सके। वहीं, प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन, लाठीचार्ज का सहारा लिया, लेकिन हजारों की संख्या में पहुंचे हिंदू संगठन के लोग पीछे हटने को तैयार नहीं थे। हालांकि, कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस को सफलता मिल गई। अब सवाल यह उठता है कि आखिर यह विवाद इतना बढ़ा कैसे, तो आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि इस विवाद के पीछे क्या वजह है।

क्या है विवाद?

संजौली की मस्जिद को लेकर पहली बार शिकायत साल 2010 में की गई थी। मामले की सुनवाई कोर्ट में चल रही है, ऐसे में सवाल उठता है कि अगर मामला इतना पुराना है तो अचानक हिमाचल प्रदेश में इसे लेकर हंगामा क्यों मच रहा है?
दरअसल, 31 अगस्त को दो समुदायों के बीच झगड़ा हुआ था। एक समुदाय के लोगों ने स्थानीय व्यक्ति की पिटाई कर दी थी। युवक की पिटाई के विरोध में हिंदू संगठन भड़क गए और पहले 1 सितंबर और फिर 5 सितंबर को विरोध प्रदर्शन हुआ। यहीं से मस्जिद का मुद्दा भी फिर उठने लगा।

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि संजौली के पॉश इलाके में बिना इजाजत और बिना नक्शा पास कराए 5 मंजिला मस्जिद बना दी गई है। यह अवैध है और इसे गिराया जाना चाहिए।

स्थानीय लोगों के मुताबिक यहां बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज अदा करने आते हैं और उनकी वजह से इलाके का माहौल खराब हो रहा है। वहीं, मस्जिद के इमाम शहजाद का कहना है कि झगड़े के मामले में अलग से कार्रवाई होनी चाहिए, इसे मस्जिद से क्यों जोड़ा जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह मस्जिद वर्ष 1947 से पहले बनी थी और तब यह कच्ची थी।

किसी को कानून हाथ में नहीं लेने देंगे- सीएम सुक्खू

संजौली मस्जिद विवाद पर शिमला पुलिस प्रशासन के साथ प्रदेश की सुक्खू सरकार भी अलर्ट पर है। शिमला के SP संजीव कुमार गांधी ने कहा, “कल और पहले भी लोगों से अपील की गई थी कि शांति व्यवस्था को बनाए रखने में सहयोग करें। BNS की धारा 163 के तहत प्रावधान लगाए गए थे। कुछ लोगों के साथ बैठक भी की गई थी, सभी ने आश्वासित किया था कि सब कुछ शांतिपूर्ण तरीके से होगा लेकिन कल हमने देखा कि किस प्रकार से सुनियोजित तरीके से प्लान करके यह(विरोध प्रदर्शन) किया गया और पत्थरबाजी भी हुई। पुलिस को चोटें आईं… हम जरूरी कार्रवाई करेंगे…” वहीं हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि किसी को कानून हाथ में नहीं लेने देंगे।

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