राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता और मंत्री हसन मुश्रीफ ने विदर्भ के वाशिम जिले के गार्जियन मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। मुश्रीफ ने पार्टी नेतृत्व को बताया कि वह अपने निर्वाचन क्षेत्र कागल (कोल्हापुर) को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं, जो वाशिम से 600 किलोमीटर से अधिक दूर है।

मुश्रीफ की मांग
हसन मुश्रीफ, जो चिकित्सा शिक्षा मंत्री हैं, कोल्हापुर जिले के कागल विधानसभा क्षेत्र से आते हैं। 70 वर्षीय नेता चाहते थे कि उन्हें उनके गृहनगर के करीब के जिले का गार्जियन मंत्री बनाया जाए। हालांकि, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उन्हें विदर्भ क्षेत्र के वाशिम जिले की जिम्मेदारी सौंपी।
समय प्रबंधन में दिक्कत
मुश्रीफ के करीबी सूत्रों के अनुसार, वह हफ्ते में तीन दिन (शुक्रवार, शनिवार और रविवार) अपने निर्वाचन क्षेत्र कागल में बिताते हैं। ऐसे में, 600 किलोमीटर दूर वाशिम जिले का दौरा करना उनके लिए मुश्किल हो गया था।
NCP की अगली पसंद
NCP के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, पार्टी दत्तात्रेय भारने को इस पद के लिए सिफारिश कर सकती है। भारने, जो खेल और अल्पसंख्यक मामलों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, को अभी तक किसी जिले का गार्जियन मंत्री नहीं बनाया गया है।
महायुति गठबंधन में तनाव
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आई है जब महायुति गठबंधन में दो अन्य जिलों—रायगढ़ और नासिक—के गार्जियन मंत्री पद को लेकर तनाव है। NCP और शिवसेना दोनों ने इन जिलों पर दावा ठोक रखा है।
अधिक जानकारी
हसन मुश्रीफ
- NCP के वरिष्ठ नेता हैं।
- वर्तमान में महाराष्ट्र सरकार में चिकित्सा शिक्षा मंत्री के रूप में कार्यरत हैं।
दत्तात्रेय भारने
- खेल और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री हैं।
- उन्हें वाशिम जिले का गार्जियन मंत्री बनाए जाने की संभावना है।
निष्कर्ष
हसन मुश्रीफ का इस्तीफा महायुति गठबंधन के भीतर चल रहे तनाव को दर्शाता है। अब देखना होगा कि NCP और शिवसेना के बीच रायगढ़ और नासिक जिलों के गार्जियन मंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान का क्या नतीजा निकलता है।
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