bY
Yoganand Shrivastava
Gwalior news: मध्य प्रदेश में एक डिप्टी कलेक्टर से करीब तीन लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। ठगों ने खुद को मुख्यमंत्री कार्यालय का कर्मचारी बताकर विभागीय जांच में सजा कम कराने का भरोसा दिया और किस्तों में कुल दो लाख पचानवे हजार रुपये ऐंठ लिए।
कॉल से शुरू हुआ पूरा खेल
थाटीपुर थाना क्षेत्र की न्यू अशोक कॉलोनी में रहने वाले अरविंद सिंह माहौर, जो उस समय मुरैना जिले के सबलगढ़ में पदस्थ थे, के मोबाइल पर उन्नीस सितंबर की रात एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। अनजान नंबर देखकर उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।
कलेक्टर के नाम का इस्तेमाल
इसके बाद कॉल करने वाले ने कलेक्टर को फोन कर कहा कि वह मुख्यमंत्री पोर्टल कार्यालय से बोल रहा है और डिप्टी कलेक्टर फोन नहीं उठा रहे हैं। कलेक्टर के कहने पर कुछ देर बाद एक अन्य नंबर से कॉल आया, जिसे रिसीव किया गया।
विश्वास दिलाने के लिए फर्जी पहचान
कॉल करने वाले का नंबर मोबाइल पहचान प्रणाली में “सीएम पोर्टल – अश्विनी” नाम से दिखाई दिया। कलेक्टर के संदर्भ का हवाला देने के कारण अधिकारी को बात पर भरोसा हो गया।
विभागीय कार्रवाई में राहत का लालच
आरोपी ने खुद को सीएम कार्यालय का कर्मचारी बताते हुए कहा कि चल रही विभागीय जांच में सजा कम कराने के लिए कुछ राशि जमा करनी होगी। भरोसा कर डिप्टी कलेक्टर ने उन्नीस सितंबर से एक अक्टूबर के बीच अलग-अलग खातों और माध्यमों से पैसे भेज दिए।
लगातार मांग से बढ़ा शक
जब रकम देने के बाद भी आरोपी लगातार और पैसों की मांग करता रहा, तब अधिकारी को संदेह हुआ। जानकारी जुटाने पर पता चला कि मुख्यमंत्री कार्यालय में इस नाम का कोई कर्मचारी नहीं है।
साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत
ठगी का अहसास होने पर डिप्टी कलेक्टर ने तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर उन्नीस तीस पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद थाटीपुर थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
ई-शून्य प्राथमिकी अभियान के तहत कार्रवाई
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनु बेनीवाल के अनुसार, प्रदेश में ई-शून्य प्राथमिकी अभियान चल रहा है। इसी के तहत यह मामला दर्ज किया गया है और जांच जारी है।
फरियादी अधिकारी पहले से निलंबित, पुराना विवाद भी जुड़ा
महिला ने लगाए थे गंभीर आरोप
जिस अधिकारी से ठगी हुई, वे पहले से निलंबित हैं। ग्वालियर की एक महिला ने उन पर बेटी को फोन कर परेशान करने और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप लगाए थे।
वीडियो सहित शिकायत
महिला ने जनसुनवाई के दौरान वीडियो साक्ष्य के साथ शिकायत दर्ज कराई थी। वीडियो में अधिकारी कथित तौर पर गाली-गलौज और आपत्तिजनक टिप्पणी करते दिखाई दिए थे।
धमकी देने के आरोप
पीड़ित परिवार का आरोप था कि अधिकारी ने न केवल बेटी को देर रात फोन किए, बल्कि रिश्तेदारों को भी धमकाया और झूठे मामलों में फंसाने की बात कही।
कार्रवाई के बाद निलंबन
शिकायत की जांच के बाद विभागीय कार्रवाई करते हुए अधिकारी को निलंबित कर दिया गया। मुख्यमंत्री ने स्वयं इस निलंबन की जानकारी सार्वजनिक की थी।
वर्तमान स्थिति
सितंबर तक वे सबलगढ़ में पदस्थ थे, फिलहाल उन्हें चंबल संभागीय कार्यालय से संबद्ध किया गया है।





