BY: Yoganand Shrivastva
ग्वालियर: हाईकोर्ट ने शिक्षक ब्रजराज सिंह चौहान की सरकारी नौकरी के लिए दायर याचिका खारिज कर दी है। याचिकाकर्ता ने लगभग 30 साल बाद राज्य सरकार से शासकीय सेवक के रूप में नियुक्ति की मांग की थी, लेकिन अदालत ने यह कहते हुए याचिका खारिज की कि इतनी देरी से दावा करना न्यायसंगत नहीं है। एकल पीठ ने कहा कि ब्रजराज सिंह को 2015 में ही अपने दावे के खारिज होने की जानकारी थी, बावजूद इसके उन्होंने 2022 में अदालत का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसे ‘दर्शक’, जो दूसरों की सफलता का इंतजार करते हैं और फिर देर से राहत मांगते हैं, उन्हें न्याय नहीं मिलना चाहिए।
ब्रजराज सिंह चौहान श्योपुर कला के हजारेश्वर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में उप-प्राचार्य थे। राज्य सरकार ने 27 जून 1995 को इस निजी स्कूल का अधिग्रहण किया और 131 कर्मचारियों के अवशोषण का आदेश जारी किया। चूंकि सरकार के स्वीकृत स्टाफिंग पैटर्न में उप-प्राचार्य का पद शामिल नहीं था, इसलिए उनका अवशोषण नहीं हो सका। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद, स्क्रीनिंग कमेटी ने 24 जून 2013 को उन्हें लेक्चरर (गणित) पद के लिए योग्य पाया। इसके बावजूद 8 जून 2015 को राज्य सरकार ने पदों की अनुपलब्धता और आवश्यक योग्यता न होने का हवाला देते हुए उनके अवशोषण से इनकार कर दिया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि मूल रूप से स्वीकृत 131 पद पहले ही भरे जा चुके हैं और याचिकाकर्ता जिले के अन्य स्कूलों में रिक्त पदों पर नियुक्ति का दावा नहीं कर सकते। इस फैसले से स्पष्ट हो गया कि सरकारी नौकरी की मांग में अत्यधिक देरी वाले मामले में अदालत किसी प्रकार की राहत नहीं देती और समय पर कार्रवाई करना आवश्यक है।





