गुडमल्लम लिंगम का रहस्य: 60 साल में एक बार प्रकट होता है काशी का जल?

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गुडमल्लम लिंगम का रहस्य

क्या है गुडमल्लम लिंगम का रहस्य?

भारत के दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश में स्थित एक छोटा-सा गाँव गुडमल्लम—शिव भक्ति के इतिहास में एक अनोखा स्थान रखता है। यहां स्थित परशुरामेश्वर मंदिर का शिवलिंग न केवल भारत, बल्कि दुनिया का सबसे लंबे समय से लगातार पूजित शिवलिंग माना जाता है।

लेकिन क्या बात है जो गुडमल्लम लिंगम को इतना अनोखा बनाती है? क्या इसके पीछे छिपा है कोई चमत्कार? और क्या वाकई में यह शिवलिंग हर 60 साल में स्वयं जलाभिषेक पाता है? आइए जानते हैं इस रहस्यपूर्ण मंदिर से जुड़ी सारी कहानियाँ और ऐतिहासिक तथ्य।


🏞️ गुडमल्लम गांव: जहां इतिहास और भक्ति का संगम होता है

  • गुडमल्लम गांव तिरुपति से 20 किमी पहले, चेन्नई नेशनल हाईवे पर स्थित है।
  • गांव स्वर्णमुखी नदी के किनारे बसा है और आज भी खेती प्रधान है।
  • कहा जाता है कि प्राचीन काल में यह क्षेत्र घने जंगलों से ढका रहता था।

यह वही स्थान है जहां हजारों वर्षों से गुडमल्लम लिंगम की पूजा होती आ रही है।


🔍 गुडमल्लम लिंगम का इतिहास और पुरातत्व प्रमाण

  • इस लिंगम की खोज 1913 में ASI के टी.ए. गोपीनाथ राव ने की थी।
  • 1973 में खुदाई के दौरान यहां दूसरी और तीसरी सदी के मिट्टी के बर्तन मिले, जिससे इसे सातवाहन काल से जोड़ा गया।
  • एपिग्राफिका इंडिका में बाना राजा विक्रमादित्य द्वितीय के तांबे के लेखों में इसका उल्लेख मिलता है।

👉 बात स्पष्ट है: यह लिंगम करीब 2300 साल पुराना है, जबकि मंदिर की इमारत करीब 1000–1300 साल पुरानी है।

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✨ गुडमल्लम लिंगम की अनोखी बनावट

यह सिर्फ एक लिंगम नहीं, बल्कि शिव की पूरी मूर्ति है।

  • लिंगम की ऊँचाई: लगभग 5.5 फीट
  • शिव जी शिकारी रूप में चित्रित हैं
  • एक हाथ में कमंडल, दूसरे में भेड़
  • कंधे पर कुल्हाड़ी, नीचे एक बौने पर खड़े
  • बाल जटाओं जैसे, गहनों से सुसज्जित

यह लिंगम एकमात्र ऐसा है जिसमें भगवान शिव को पुरुष लिंग के प्रतीक के साथ पूर्ण रूप में उकेरा गया है।


🔥 पौराणिक मान्यताएं और चमत्कारी घटनाएं

1. परशुराम कथा:

  • परशुराम ने पितृ आज्ञा से माता का वध किया
  • प्रायश्चित के लिए शिव की तपस्या की
  • हर दिन दिव्य फूल चढ़ाते थे
  • एक दिन यक्ष चित्रसेन ने पहले ही फूल चढ़ा दिया
  • क्रोधित परशुराम ने यक्ष पर प्रहार किया
  • अंत में शिव ने दोनों को लिंगम में समाहित कर लिया

2. रहस्यमय जलाभिषेक:

  • हर 60 साल में एक बार मंदिर का गर्भगृह पानी से भर जाता है
  • यह जल कुछ ही मिनटों में गायब हो जाता है
  • आखिरी बार यह घटना 4 दिसंबर 2005 को हुई थी
  • इसे काशी से आए दिव्य जल का अभिषेक माना जाता है

Parashurameshwara Temple on Wikipedia


🏛️ मंदिर की वास्तुकला और धार्मिक महत्व

  • गर्भगृह गजपृष्ठ आकार का है (हाथी की पीठ जैसा)
  • फर्श मुख्य द्वार से नीचे है
  • दीवारों में ब्रह्मा, विष्णु, गणेश की मूर्तियाँ
  • पास ही देवी पार्वती, कार्तिकेय, सूर्यदेव के छोटे मंदिर हैं

इस मंदिर को चोल, विजयनगर, पल्लव और बाना वंश ने कई बार पुनर्निर्मित किया।


🧭 सिंधु घाटी और पाशुपत संप्रदाय से संबंध

  • लिंगम में हाथी, भेड़, ड्रम, और व्यापारिक प्रतीकों की आकृतियाँ उकेरी गई हैं
  • इससे इसका संबंध सिंधु घाटी सभ्यता से जोड़ा गया है
  • यह पाशुपत संप्रदाय का महत्वपूर्ण केंद्र भी माना जाता है
  • पाशुपत शिव के सबसे पुराने उपासना रूपों में से एक है

🛠️ कुछ प्रतीक धातु विज्ञान से भी जुड़े हैं, जिससे लगता है कि उस काल में यह इलाका मेटलर्जिस्ट्स का केंद्र रहा होगा।


📜 निष्कर्ष: गुडमल्लम लिंगम — जीवित इतिहास का प्रमाण

गुडमल्लम लिंगम का रहस्य केवल एक धार्मिक आस्था नहीं है, यह भारतीय इतिहास, शिल्पकला, वास्तुशास्त्र और पुराणों का एक अनमोल संगम है। यह स्थान आज भी भक्तों को शिव की अनंत शक्ति का अनुभव कराता है।

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