इतिहास का छुपा चैप्टर: जब एक ही शख्स ने निभाया राम और सीता का किरदार

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इतिहास का छुपा चैप्टर: जब एक ही शख्स ने निभाया राम और सीता का किरदार

BY: MOHIT JAIN

भारतीय सिनेमा का इतिहास कई सुनहरी कहानियों से भरा हुआ है, लेकिन कुछ किस्से ऐसे हैं, जिन्हें जानकर दर्शक आज भी चौंक जाते हैं। ऐसा ही एक किस्सा है बॉलीवुड की पहली डबल रोल फिल्म का, जिसमें एक ही कलाकार ने भगवान राम और माता सीता दोनों का किरदार निभाया था। यह फिल्म 112 साल पहले बनी थी और इसका नाम है ‘लंका दहन’


किसने बनाई थी ये ऐतिहासिक फिल्म?

  • फिल्म के निर्माता और निर्देशक थे दादा साहब फाल्के, जिन्हें भारतीय सिनेमा का जनक माना जाता है।
  • उन्होंने 1913 में भारत की पहली फीचर फिल्म ‘राजा हरिश्चंद्र’ बनाई थी।
  • इसके बाद उन्होंने 1917 में ‘लंका दहन’ नामक फिल्म बनाई, जो भारतीय सिनेमा की पहली डबल रोल फिल्म बन गई।

अन्ना सालुंके: पहले डबल रोल निभाने वाले अभिनेता

  • फिल्म में राम और सीता दोनों का किरदार निभाया था अन्ना सालुंके ने।
  • उस दौर में महिलाओं का फिल्मों में आना असंभव सा था, इसलिए अन्ना को ही महिला किरदार भी निभाना पड़ा।
  • यह पहली बार था जब एक ही अभिनेता ने पुरुष और महिला दोनों भूमिकाएं निभाईं।

ऐसे निभाया गया राम और सीता का रोल

  • अन्ना सालुंके ने पहले फिल्म ‘राजा हरिश्चंद्र’ में रानी तारामती की भूमिका निभाई थी।
  • इसके बाद ‘लंका दहन’ में उन्होंने भगवान राम का किरदार निभाया और उसी फिल्म में माता सीता भी बने।
  • इस तरह उन्होंने भारतीय सिनेमा का पहला डबल रोल करके इतिहास रच दिया।

जब नहीं मिली एक्ट्रेस, लिया गया बड़ा फैसला

  • फिल्म की लंबाई सिर्फ 40 मिनट थी, लेकिन स्क्रिप्ट में महिला किरदार जरूरी था।
  • जब फाल्के को कोई एक्ट्रेस नहीं मिली, तो उन्होंने अन्ना से ही सीता का रोल करवाया।
  • उस समय समाजिक दृष्टिकोण से महिलाओं का फिल्म में आना असंभव था।

पहली मुलाकात: रेस्टोरेंट से फिल्म सेट तक

  • दादा साहब फाल्के और अन्ना सालुंके की मुलाकात एक रेस्टोरेंट में हुई थी।
  • अन्ना वहां वेटर का काम करते थे और उन्हें महीने के 10 रुपये मिलते थे।
  • फाल्के ने उन्हें 15 रुपये प्रतिमाह की फीस देकर फिल्म में काम करने के लिए तैयार किया।

अन्ना सालुंके का योगदान क्यों है खास?

  • अन्ना सालुंके को आज भारतीय सिनेमा के पहले डबल रोल अभिनेता के रूप में याद किया जाता है।
  • उन्होंने उस समय की सामाजिक बाधाओं को पार कर एक नई मिसाल कायम की।
  • ‘लंका दहन’ आज भी भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक मील का पत्थर मानी जाती है।

ये कहानी क्यों जानना जरूरी है?

आज हम जब किसी फिल्म में डबल रोल या वीएफएक्स से बने कैरेक्टर्स देखते हैं, तो शायद अंदाज़ा नहीं लगा पाते कि एक सदी पहले, जब तकनीक नाममात्र की थी, तब एक कलाकार ने राम और सीता दोनों बनकर इतिहास रचा था।

यह सिर्फ एक फिल्म नहीं थी, यह था भारतीय सिनेमा का आत्मविश्वास, जिसने बिना संसाधनों के भी खुद को साबित किया।

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