रिपोर्ट – प्रेमपाल सिंह
Firozabad : उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले की एक विशेष अदालत ने दरोगा राजवीर सिंह की लूट और हत्या के सनसनीखेज मामले में अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। एडीजे-2 (ADJ-2) की कोर्ट ने पुख्ता सबूतों और गवाहों के आधार पर पांचों आरोपियों को दोषी पाया है। कोर्ट के इस फैसले ने न केवल एक शहीद पुलिसकर्मी के परिवार को इंसाफ दिलाया है, बल्कि अपराधियों को भी कड़ा संदेश दिया है।
ड्यूटी से लौटते वक्त हुआ था घात लगाकर हमला
Firozabad यह मामला 2 अगस्त 2010 का है, जब दरोगा राजवीर सिंह थाना रसूलपुर में तैनात थे। वह एक मामले की विवेचना के सिलसिले में कानपुर गए हुए थे। वापस लौटते समय, जब वह नगला खंगर क्षेत्र स्थित अपने घर जा रहे थे, तब रास्ते में घात लगाए बैठे बदमाशों ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया। बदमाशों ने न केवल उनकी सरकारी रिवॉल्वर और मोटरसाइकिल लूटी, बल्कि गोली मारकर उनकी निर्मम हत्या कर दी। इस घटना ने उस वक्त पूरे प्रदेश के पुलिस महकमे में आक्रोश पैदा कर दिया था।
अदालत का सख्त रुख: उम्रकैद और भारी जुर्माना
Firozabad अदालत ने मामले की गंभीरता और अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए 15 गवाहों के बयानों को आधार मानते हुए दोषियों को अलग-अलग श्रेणियों में सजा सुनाई है:
- तीन मुख्य दोषियों को उम्रकैद: हत्या और लूट के मुख्य आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा के साथ-साथ कुल ₹2.70 लाख का अर्थदंड लगाया गया है।
- दो अन्य को 7 साल की सजा: वारदात में सहयोग करने वाले दो अन्य दोषियों को सात-सात साल के कठोर कारावास और करीब ₹1.5 लाख के जुर्माने से दंडित किया गया है।
कानूनी संघर्ष और परिवार की जीत
Firozabad मृतक दरोगा के बेटे द्वारा थाना नगला खंगर में दर्ज कराए गए इस मुकदमे ने 15 वर्षों का लंबा सफर तय किया। पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए और चार्जशीट दाखिल की। अभियोजन पक्ष ने अदालत में यह साबित किया कि यह हमला न केवल एक व्यक्ति पर था, बल्कि कानून व्यवस्था की वर्दी पर हमला था। 15 साल के लंबे इंतजार के बाद आए इस फैसले ने पीड़ित परिवार को राहत दी है, जिन्होंने अपने पिता को खोने के बाद कानून की चौखट पर उम्मीद बनाए रखी थी।





