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संगम नगरी में दौड़ी ऊर्जा: प्रयागराज से शुरू हुई 40वीं अखिल भारतीय इंदिरा मैराथन

Energy runs high in the Sangam city: 40th All India Indira Marathon begins in Prayagraj

REPORT- NAFEES AHMAD

संगम नगरी प्रयागराज में इंदिरा जयंती के अवसर पर आज 40वीं अखिल भारतीय प्राइज मनी इंदिरा मैराथन का शुभारंभ ऐतिहासिक आनंद भवन से किया गया, जहां सुबह से ही धावकों और दर्शकों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। इस प्रतिष्ठित मैराथन को मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल और जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। वर्ष 1985 में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने इसकी शुरुआत की थी, तब से यह दौड़ देशभर के धावकों के लिए एक गौरवपूर्ण पहचान बन चुकी है।

इस बार कुल 524 धावकों ने भाग लिया, जिसमें पुरुष और महिला दोनों वर्गों के धावक शामिल थे। पहली बार 18 वर्ष से अधिक आयु के युवाओं को भी इसमें भाग लेने का अवसर प्रदान किया गया, जिससे प्रतियोगिता में नए जोश और ऊर्जा का संचार देखने को मिला। 42.192 किलोमीटर लंबी यह मैराथन आनंद भवन से शुरू होकर शहर की विभिन्न सड़कों से होती हुई यमुना पार घूरपुर क्षेत्र के दांदूपुर पेट्रोल पंप तक पहुंचती है और फिर अलग मार्गों से वापस लौटते हुए मदन मोहन मालवीय स्टेडियम में समाप्त होती है।

प्रतियोगिता में विजेताओं के लिए आकर्षक पुरस्कार भी घोषित किए गए हैं, जिसमें पुरुष और महिला वर्ग के प्रथम स्थान पाने वाले धावकों को उत्तर प्रदेश खेल विभाग की ओर से दो-दो लाख रुपये की नगद राशि दी जाएगी। पुरस्कार राशि की इस परंपरा ने न केवल प्रतियोगिता की प्रतिष्ठा बढ़ाई है, बल्कि युवा खिलाड़ियों को भी प्रेरित किया है।

इस वर्ष मैराथन “रन फॉर स्वच्छता” थीम पर आधारित रही, जिसे नगर निगम ने विशेष सहयोग प्रदान किया। दौड़ के दौरान स्वच्छता जागरूकता से जुड़े संदेश दिए गए और नगर निगम के कर्मियों ने सफाई अभियान के महत्व को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाई। स्केटिंग करते बच्चों ने रास्ते भर धावकों का मनोबल बढ़ाया, वहीं पुलिस बैंड द्वारा बजाई जा रही राष्ट्रीय धुनों ने पूरे माहौल को ऊर्जावान बना दिया।

धावकों में उत्साह देखते ही बन रहा था और मार्ग के किनारे जमा शहरवासियों ने तालियों और जयकारों से प्रतिभागियों का हौसला बढ़ाया। प्रयागराज की यह ऐतिहासिक मैराथन वर्षों से न केवल खेल भावना को मजबूती देती आई है, बल्कि सामाजिक जागरूकता, अनुशासन और एकता का भी संदेश देती रही है। आज की दौड़ ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि प्रयागराज केवल धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का केंद्र ही नहीं, बल्कि खेल और सामूहिक चेतना की धरती भी है।

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