Pramod Shrivastav Editorial Head
Election 2026 : एजेंडा में आज बात बंगाल में वोट क्रांति की, बात ममता के तिलिस्म की और मोदी की गारंटी की, बात बंगाल में वोटों की सुनामी की और बात बंपर वोटिंग से ममता रिटर्न की या सत्ता परिवर्तन की… क्या इस बार बंगाल के मतदाताओं का मूड़ बदला है, यदि नहीं तो ऐतिहासिक और रिकॉर्ड तोड़ मतदान के मायने आखिर क्या हैं। मतदाताओं ने बंगाल में पहले चरण के मतदान में जो उत्साह दिखाया है ये ममता के लिये है या मोदी के लिये…
ये तय तो होगा आने वाली 4 मई को। लेकिन उससे पहले अटकलों और दावों का दौर जारी है। दावे बीजेपी और टीएमसी की अपनी अपनी जीत के हैं। क्योंकि बंगाल में भाजपा ने जो गारंटी दी हैं, उसे उसका भरोसा है। कई मुद्दों पर निशाने पर ममता हैं। तो वहीं बंगाल की अस्तमिता को लेकर दीदी जनता के बीच हैं। और दावा दिल्ली फतह का। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि पहले चरण की वोटिंग में 152 सीटों पर वो कौन सी सीटें रहने वाली हैं।
Election 2026 : क्या इस बार बंगाल के बदला मतदाताओं का मूड़
जहां बीजेपी और टीएमसी को जीत मिलने वाली है। क्योंकि SIR, महिला वोटर, युवा मतदाता और सीमावर्ती जिलों का रुझान नतीजों की दिशा तय करेगा। मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण और विपक्षी वोटों का बंटवारा भी बड़ा फैक्टर बन सकता है। अब बंगाल में पहले फेज की 152 सीटों पर 92.88 फीसदी मतदान रहा। यदि यही पैटर्न दूसरे चरण की 142 सीटों पर रहा, तो यह पश्चिम बंगाल में अब तक का सबसे ज्यादा वोटिंग टर्नआउट होगा। ऐसे में सवाल यही है कि यह वोटिंग क्या ममता बनर्जी के लिए वापसी का संकेत है या मोदी के लिए सत्ता परिवर्तन का संदेश ? इसी मुद्दे पर हम चर्चा करेंगे लेकिन पहले ये
Election 2026 : बंगाल में वोटों की सुनामी, किसे लाभ किसे हानि ?
पश्चिम बंगाल में पहले चरण के लिये 152 विधानसभा सीटों पर हुई रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग ने चुनावी समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है।भारी मतदान को लोकतंत्र का उत्सव तो माना ही जा रहा है, TMC और भाजपा इसे अपने-अपने पक्ष में जनादेश का संकेत भी मान रहे हैं। दरअसल बंगाल में इस बार का चुनाव सिर्फ सीटों की लड़ाई नहीं, बल्कि राजनीतिक वर्चस्व की जंग है। एक ओर ममता बनर्जी ‘बंगाल की बेटी’, अपनी सरकार की कल्याणकारी नीतियों और SIR को लेकर जनता में आक्रोश के सहारे मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं, तो दूसरी ओर भाजपा भ्रष्टाचार, कटमनी, घुसपैठ और कानून-व्यवस्था को बड़ा मुद्दा बनाकर परिवर्तन का दावा कर रही है।

Election 2026 : रिकॉर्ड तोड़ ऐतिहासिक वोटिंग, किसके वादों पर मुहर ?
जहां एक ओर बंगाल में दीदी लगातार बीजेपी के निशाने पर हैं, मोदी और शाह की गारंटी है। तो वहीं ममता बनर्जी ने इस बंपर वोटिंग को एसआईआर के खिलाफ बंगाल के लोगों का वोट बताया। और कहा कि परिवर्तन अब दिल्ली में करना है। अब आजादी के बाद पहली बार बंगाल में 92 फीसदी से ज्यादा हुए मतदान को लेकर सियासी दल अपने नफे-नुकसान का आकलन कर रहे हैं और जीत के दावे भी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दमदम और जादवपुर में रैली के दौरान कहा कि टीएमसी का दिया बुझने वाला है। बंगाल में परिवर्तन की लहर है। और पहले चरण की वोटिंग ने इस पर मुहर लगा दी है।
पीएम ने दावा किया कि पहले चरण में जनता का भारी मतदान यह संकेत देता है कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी का ‘महाजंगलराज’ और ‘कट मनी’ का युग अब खत्म होने वाला है। उन्होंने कहा कि बंगाल से अब एक ही आवाज आ रही है। पहले चरण में टीएमसी का खाता भी नहीं खुलेगा। तो वहीं अमित शाह ने पहले चरण की 152 में से 110 सीटों पर भाजपा की जीत का दावा किया, कहा कि अबकी बार बंगाल में ममता बनर्जी का सूपड़ा साफ होने जा रहा है। 4 मई को हमारी सरकार बनेगी और बंगाल का अगला सीएम यहीं जन्म लेने वाला होगा लेकिन दीदी का भतीजा नहीं होगा।
अब भाजपा का दावा भले ही इस बार बंगाल में बदलाव का है। लेकिन दीदी भी पीछे नहीं हैं। ‘ममता दीदी’ की लोकप्रियता, महिला वोट बैंक और ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत पकड़ के दम पर मैदान में है। ममता बनर्जी चुनाव को बंगाल की अस्मिता बनाम बाहरी दखल की लड़ाई के रूप में पेश कर रही हैं। पहले चरण की बंपर वोटिंग से ममता बनर्जी में जीत का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर है और दावा अब दिल्ली फतह का।
अब 152 सीटों पर 1478 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद है। पहले चरण में यह वहीं इलाके हैं, जहां पर मुस्लिम वोटर बड़ी संख्या में हैं और घुसपैठ का मुद्दा भी काफी हावी रहा। इसके अलावा वोटिंग में बढोत्तरी में SIR को भी अहम वजह माना जा रहा है। जाहिर है महिला वोटर, अल्पसंख्यक मतदाता और ग्रामीण बंगाल। ये तीन फैक्टर चुनाव की दिशा तय कर सकते हैं। महिला आरक्षण, लक्ष्मी भंडार जैसी योजनाएं ममता के पक्ष में माहौल बना सकती हैं, तो वहीं केंद्रीय योजनाओं बंगाल में गारंटी और हिंदुत्व की राजनीति भाजपा के लिए जमीन मजबूत कर रही है।
कुल मिलाकर पहले चरण की वोटिंग के बाद भले ही भाजपा और टीएमसी के हौसलें बुलंद हैं। लेकिन मुकाबला बेहद कांटे का है। यदि शहरी और सीमावर्ती इलाकों में भाजपा बढ़त बनाती है, तो सत्ता परिवर्तन की पटकथा लिखी जा सकती है। लेकिन ग्रामीण और महिला वोट बैंक ममता के साथ मजबूती से खड़ा रहा, तो ‘ममता रिटर्न’ तय माना जाएगा। यानी बंगाल में इस बार सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि जनादेश की बड़ी परीक्षा है। ऐसे में सवाल यही है कि क्या ममता का तिलिस्म कायम रहेगा या मोदी की गारंटी नया इतिहास लिखेगी ? अब फैसला जनता के हाथ में है और आने वाली 4 मई को तय होगा कि ममता रिटर्न या सत्ता परिवर्तन।





