डॉली चायवाला की फ्रेंचाइज़ी को 48 घंटे में 1600+ आवेदन मिले – जानें क्यों मच रही है धूम

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डॉली चायवाला

नागपुर की गलियों में चाय बेचने वाला डॉली चायवाला अब एक राष्ट्रीय ब्रांड बन चुका है। इंटरनेट सेंसेशन बनने के बाद अब डॉली ने अपने ब्रांड ‘डॉली की टपरी’ को पूरे भारत में फैलाने की योजना बनाई है, और इसके लिए उन्होंने फ्रेंचाइज़ी मॉडल लॉन्च कर दिया है।

घोषणा के 48 घंटे के भीतर ही 1,600 से अधिक लोग इसके लिए आवेदन कर चुके हैं।


कौन हैं डॉली चायवाला?

सुनिल पाटिल, जिन्हें आज सभी डॉली चायवाला के नाम से जानते हैं, नागपुर के रहने वाले एक चायवाले हैं। उनकी अनोखी चाय परोसने की स्टाइल और रंग-बिरंगे पहनावे ने उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

2024 में तब उन्हें और भी ज्यादा पहचान मिली जब उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स को चाय परोसी, जिसकी वीडियो इंटरनेट पर लाखों बार देखी गई।


क्या है ‘डॉली की टपरी’ फ्रेंचाइज़ी मॉडल?

डॉली ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर फ्रेंचाइज़ी लॉन्च की घोषणा करते हुए लिखा:

“यह भारत का पहला वायरल स्ट्रीट ब्रांड है, और अब यह एक बिज़नेस अवसर है। कार्ट से लेकर फ्लैगशिप कैफ़े तक, हम पूरे देश में लॉन्च कर रहे हैं और ऐसे लोगों की तलाश कर रहे हैं जिनमें सच्चा जुनून हो। अगर आपने कभी कुछ बड़ा, देसी और लीजेंडरी बनाने का सपना देखा है — तो यह मौका आपका है।”

साथ ही उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी में एक एप्लीकेशन लिंक भी शेयर किया।


फ्रेंचाइज़ी के विकल्प और लागत

डॉली की टपरी तीन अलग-अलग निवेश मॉडल ऑफर कर रही है:

1. कार्ट स्टॉल मॉडल

  • 💰 लागत: ₹4.5 लाख से ₹6 लाख
  • 🛒 उपयुक्त: छोटे स्तर पर शुरुआत करने वाले उद्यमियों के लिए

2. स्टोर मॉडल

  • 💰 लागत: ₹20 लाख से ₹22 लाख
  • 🏬 उपयुक्त: स्थायी जगह पर दुकान खोलने वालों के लिए

3. फ्लैगशिप कैफ़े

  • 💰 लागत: ₹39 लाख से ₹43 लाख
  • ☕ उपयुक्त: प्रीमियम और बड़े स्तर पर कैफ़े ब्रांड शुरू करने वालों के लिए

यह सभी मॉडल डॉली की टपरी को एक संगठित और राष्ट्रीय स्तर पर ब्रांड बनाने की दिशा में कदम हैं।


इंटरनेट पर मचा धूम: 48 घंटे में 1,600+ आवेदन

घोषणा के बाद से सोशल मीडिया पर इस फ्रेंचाइज़ी को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला है।

लोगों की प्रतिक्रियाएं:

  • एक यूज़र ने लिखा: “बर्गर खाएगा से बर्गर बेचेगा तक, डॉली ने लंबा सफर तय किया है। ऑल द बेस्ट!”
  • वहीं कुछ लोग सतर्क भी दिखे: “कोई फ्रेंचाइज़ी मत लेना… खून के आँसू रोने पड़ेंगे… ये लोग पैसे लेकर दुबई चले जाएंगे और तुम बैंक नीलामी में फंसे रहोगे।”
  • एक अन्य यूज़र ने कहा: “भारत में एजुकेशन अब सिर्फ़ एक स्कैम है।”

संघर्ष से सफलता तक: डॉली की असली कहानी

डॉली चायवाला ने अपने करियर की शुरुआत नागपुर की सड़कों पर चाय बेचते हुए की थी। उन्होंने कभी स्कूल नहीं देखा, लेकिन 20 साल तक परिवार के साथ चाय स्टॉल पर काम किया।

उनकी खास स्टाइल और फेशन सेंस के चलते धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर उन्हें पहचान मिलनी शुरू हुई।

बिल गेट्स को चाय परोसने वाली वीडियो ने उन्हें इंटरनेशनल पहचान दिलाई और यहीं से उनके ब्रांड बनने की शुरुआत हुई।


आलोचना पर डॉली का जवाब: उम्मीद का संदेश

कुछ लोगों ने डॉली की एजुकेशन न होने को लेकर आलोचना की, जिस पर उन्होंने भावुक पोस्ट लिखी:

“मुझे स्कूल जाने का मौका नहीं मिला, लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी। आज मुझे गर्व है कि मैं यहां तक पहुंचा।”

उन्होंने आगे लिखा:

“अगर मेरी कहानी एक भी ऐसे लड़के या लड़की को प्रेरित कर दे जिसके पास न पैसा है, न डिग्री, और न कोई पहचान—तो मेरे लिए यही सबसे बड़ी जीत है।”


निष्कर्ष: सिर्फ चाय नहीं, यह एक सपना है

डॉली चायवाला की फ्रेंचाइज़ी सिर्फ एक कारोबारी अवसर नहीं है, यह एक सपना है—उन लोगों के लिए जो बिना संसाधनों के भी बड़ा बनने की चाह रखते हैं।

अगर आप भी अपने शहर में ‘डॉली की टपरी’ खोलना चाहते हैं, तो यह मौका आपका हो सकता है।

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