रिपोर्ट: उपेंद्र कुमावत
हवन–पूजन और सुंदरकांड पाठ के साथ जारी रहा सत्याग्रह
Dhar धार की ऐतिहासिक भोजशाला में मंगलवार को नियमित मुक्ति सत्याग्रह के तहत धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। हवन और पूजन के बाद सुंदरकांड का पाठ किया गया। बसंत पंचमी के समीप होने के कारण बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोग भोजशाला की मुक्ति और मां वाग्देवी सरस्वती की पुनर्स्थापना के संकल्प के साथ सत्याग्रह में शामिल हुए। उल्लेखनीय है कि भोजशाला के गर्भगृह में यह सत्याग्रह वर्ष 2003 से लगातार चल रहा है।

संतों की सहभागिता, एकजुट संघर्ष का आह्वान
Dhar आज के सत्याग्रह में उज्जैन से पहुंचे क्रांतिकारी संत डॉ. अवधेशपुरी महाराज और स्वास्तिक पीठाधीश्वर एवं ज्योतिषाचार्य डॉ. विद्याश्री पुरी विशेष रूप से शामिल हुए। दोनों संतों ने भोजशाला परिसर का भ्रमण कर सत्याग्रह में भाग लिया। मीडिया से चर्चा में डॉ. अवधेशपुरी महाराज ने कहा कि भोजशाला प्राचीन काल में मां वाग्देवी सरस्वती का मंदिर और संस्कृत की पाठशाला रही है, जो ज्ञान और संस्कारों का प्रमुख केंद्र थी। उन्होंने समाज से जाति और भेदभाव से ऊपर उठकर एकजुट होने का आह्वान किया।

अखंड ज्योत और वाग्देवी आगमन की कामना
Dhar सत्याग्रह में सहभागी डॉ. विद्याश्री पुरी ने भोजशाला में अखंड ज्योत प्रज्वलित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि चौबीस घंटे अखंड ज्योत जलने से नकारात्मक ऊर्जा का अंत होगा और सभी बाधाएं दूर होने के बाद मां वाग्देवी सरस्वती का शीघ्र आगमन होगा। सत्याग्रह के समापन पर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने हवन में आहुति देकर भोजशाला की मुक्ति का संकल्प दोहराया।





