BY
Yoganand Shrivastava
Dehli news: आने वाले समय में देशभर के बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना है। केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग बिजली एक्सचेंजों पर लगने वाले पावर ट्रेडिंग शुल्क को कम और तर्कसंगत बनाने पर विचार कर रहा है। इस कदम से बिजली की कुल लागत में धीरे-धीरे कमी आ सकती है।
जनवरी 2026 से चरणबद्ध लागू करने की तैयारी
आयोग की योजना इन सुधारों को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की है, जिसकी शुरुआत जनवरी 2026 से प्रस्तावित है। इससे बिजली बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर कीमतों में समानता आएगी।
बाजार समेकन से तय होगी एक समान कीमत
केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग पहले ही बिजली बाजार के समेकन को मंजूरी दे चुका है। इसका उद्देश्य अलग-अलग एक्सचेंजों पर होने वाली बिजली खरीद-बिक्री को एकीकृत प्रणाली में लाना है, ताकि एक ही तरह की कीमत तय हो सके और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
ट्रांजैक्शन शुल्क की हो रही समीक्षा
आयोग ने दिसंबर 2025 में बिजली एक्सचेंजों द्वारा वसूले जाने वाले ट्रांजैक्शन शुल्क की समीक्षा से जुड़े एक विचार-पत्र को अंतिम रूप दिया है। इसमें यह परखा जा रहा है कि मौजूदा प्रति यूनिट दो पैसे की अधिकतम शुल्क सीमा, तेजी से बढ़ते बिजली बाजार के लिए उपयुक्त है या नहीं।
शुल्क घटाने के विकल्पों पर मंथन
विचाराधीन प्रस्तावों में अधिकतर ट्रेडिंग श्रेणियों के लिए प्रति यूनिट 1.5 पैसे की निश्चित ट्रांजैक्शन फीस तय करने का विकल्प शामिल है। वर्तमान व्यवस्था में एक्सचेंज आमतौर पर अधिकतम सीमा के आसपास शुल्क वसूलते हैं।
टर्म-अहेड बाजार के लिए कम शुल्क का प्रस्ताव
आयोग टर्म-अहेड बाजार के अनुबंधों के लिए प्रति यूनिट 1.25 पैसे की और कम शुल्क दर पर भी विचार कर रहा है। इसका कारण इन सौदों की लंबी अवधि और अपेक्षाकृत कम परिचालन लागत को बताया गया है।
दाम घटने से उपभोक्ताओं को होगा फायदा
यदि ये प्रस्ताव लागू होते हैं, तो बिजली खरीद की लागत घटेगी, जिसका सीधा लाभ अंततः आम उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है। आयोग का मानना है कि इससे बाजार की दक्षता बढ़ेगी और बिजली दरों में संतुलन आएगा।





