BY
Yoganand Shrivastava
Dehli news: पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत की कड़ी सैन्य प्रतिक्रिया ने पाकिस्तान की राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व को गहरे तनाव में डाल दिया था। हालात ऐसे बन गए थे कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को भी सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी गई।
जरदारी का बड़ा खुलासा
इस्लामाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने स्वयं इस बात को स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि मई महीने में जब भारत की ओर से सैन्य कार्रवाई तेज हुई, तब उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई गई थी।
बंकर में जाने की दी गई थी हिदायत
जरदारी के अनुसार, उनके सैन्य सचिव ने उन्हें सूचित किया कि हालात युद्ध जैसे हो चुके हैं और सुरक्षा के लिहाज से बंकर में जाना जरूरी है। यह बयान उस भय को दर्शाता है, जो भारतीय सेना की कार्रवाई के दौरान पाकिस्तान की शीर्ष नेतृत्व में व्याप्त था।
पहलगाम हमले के बाद बढ़ा तनाव
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान गई थी। इस हमले के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए जवाबी सैन्य कदम उठाने का फैसला किया।
ऑपरेशन सिंदूर के तहत कार्रवाई
भारत ने मई की शुरुआत में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान के खिलाफ सटीक और रणनीतिक सैन्य कार्रवाई की। इस अभियान का उद्देश्य आतंकी हमले का जवाब देना और भविष्य में ऐसे प्रयासों को रोकना था।
संघर्षविराम की पहल पाकिस्तान की ओर से
भारतीय सैन्य कार्रवाई के दबाव में पाकिस्तान की ओर से संघर्षविराम का प्रस्ताव रखा गया। पाकिस्तान के सैन्य संचालन महानिदेशक ने भारत के समकक्ष अधिकारी से संपर्क किया, जिसके बाद दोनों पक्षों में संघर्षविराम पर सहमति बनी।
भारत की सैन्य ताकत का संदेश
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि आतंकवाद के खिलाफ भारत किसी भी स्तर पर सख्त कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। भारतीय सेना की इस कार्रवाई ने क्षेत्र में भारत की सैन्य क्षमता और दृढ़ इच्छाशक्ति का संदेश दिया।





