Report: Akhul
Damoh मध्य प्रदेश के दमोह जिले में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) एस.के. नेमा पर लोक शिक्षण संचालनालय (DPI), भोपाल के स्पष्ट निर्देशों का उल्लंघन करने के आरोप लगे हैं। राज्य सरकार द्वारा शिक्षकों के सभी प्रकार के गैर-शैक्षणिक अटैचमेंट समाप्त करने के सख्त आदेशों के बावजूद, दमोह में दर्जनों शिक्षक स्कूल छोड़कर कार्यालयों में जमे हुए हैं।

सरकारी आदेश दरकिनार, दफ्तरों में जमे शिक्षक
Damoh लोक शिक्षण संचालनालय ने हाल ही में प्रदेश भर में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने के लिए स्कूलों से बाहर अटैच किए गए शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से मूल पदस्थापना पर भेजने के निर्देश दिए थे। इसके उलट, दमोह डीईओ कार्यालय में लगभग एक दर्जन शिक्षक नियमों के विरुद्ध अपनी सेवाएं दे रहे हैं। प्रशासनिक कार्य के नाम पर शिक्षकों को स्कूलों से दूर रखने की इस व्यवस्था ने विभाग की मंशा पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
बिसनाखेड़ी के छात्रों का भविष्य अधर में
Damoh इस मनमानी का सबसे बुरा असर एकीकृत माध्यमिक शाला बिसनाखेड़ी में देखने को मिल रहा है। यहाँ पदस्थ शिक्षक कृष्ण कुमार अठया पिछले दो वर्षों से जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अटैच हैं। ग्रामीणों और छात्रों का आरोप है कि शिक्षक की अनुपस्थिति के कारण स्कूल में पढ़ाई पूरी तरह ठप है। चूंकि रिकॉर्ड में शिक्षक की पदस्थापना इसी स्कूल में है, इसलिए नियमों के चलते यहाँ किसी ‘अतिथि शिक्षक’ की नियुक्ति भी नहीं हो पा रही है। बच्चों का कहना है कि उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
डीईओ के ‘गोल-मोल’ जवाब और बढ़ता आक्रोश
Damoh जब इस गंभीर अव्यवस्था और नियमों के उल्लंघन को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी एस.के. नेमा से सवाल किए गए, तो उन्होंने स्पष्ट जवाब देने के बजाय मामले को टालने की कोशिश की। उनके “देखते हैं” जैसे गैर-जिम्मेदाराना बयान ने अभिभावकों और स्थानीय लोगों के आक्रोश को और बढ़ा दिया है। अब देखना होगा कि उच्च अधिकारी दमोह में नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले इस मामले पर क्या संज्ञान लेते हैं।
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