स्टीयरिंग व्हील के पीछे फंसा कोई किरदार, फोन कॉल पर उलझा हुआ, और एक प्रियजन को बचाने की जद्दोजहद – यह फॉर्मूला कई फिल्मों में आजमाया जा चुका है। ‘Crazxy’ भी इसी ट्रैक पर चलती है, जहां अभिनेता सोहम शाह एक सर्जन, डॉ. अभिमन्यु सूद की भूमिका में नजर आते हैं। एक महत्वपूर्ण मीटिंग के लिए निकले अभिमन्यु को एक कॉल मिलता है जो उनकी दुनिया को हिला कर रख देता है। इस कॉल के बाद, वह तेजी से परिस्थितियों को संभालने और अपनी फैमिली के एक सदस्य को संकट से बचाने की कोशिश करता है।
थ्रिलर के साथ इमोशनल ड्रामा का मेल
93 मिनट की यह फिल्म एक हाई-टेंशन थ्रिलर के रूप में बनाई गई है, जहां दर्शकों को हर पल कुछ नया देखने को मिलता है। फिल्म में अभिमन्यु अपनी कार दौड़ाते हुए कई कॉल्स का जवाब देता है – उसकी एक्स-वाइफ (जिसकी आवाज़ निमिषा सजयन ने दी है), उसकी मौजूदा प्रेमिका (शिल्पा शुक्ला की आवाज़), उसके अस्पताल के बॉस (पियूष मिश्रा की आवाज़), और उसकी बेटी वेदिका (उन्नति सुराना) के स्कूल के एक सीनियर टीचर (टिन्नू आनंद की आवाज़) के कॉल्स आते हैं। वेदिका विशेष देखभाल की जरूरत रखने वाली बच्ची है, और उसके लिए स्कूल का माहौल चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
किरदारों की जटिलता और फिल्म का प्रभाव
जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, अभिमन्यु के कई छुपे हुए पहलू सामने आते हैं। वह एक अच्छा पिता नहीं है – जैसा कि उसकी एक्स-वाइफ की नाराजगी से जाहिर होता है। वह एक बेहतरीन डॉक्टर भी नहीं माना जाता, क्योंकि वह एक ऐसा गलती कर चुका है, जिसने एक मरीज की जान पर भारी कीमत डाल दी है। सवाल उठता है – क्या यह इंसान अपने हालात को सुधारने का रास्ता निकाल सकता है?
फिल्म की कमजोर कड़ियां
फिल्म की शुरुआत में जो रोमांच बना रहता है, वह धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगता है। शुरुआती कुछ सीन और कुछ थ्रिलिंग मोमेंट्स प्रभावी हैं, लेकिन जैसे ही अभिमन्यु की क्षमताओं और उसकी गलतफहमियों को उजागर किया जाता है, फिल्म धीमी हो जाती है। खासकर, जब वह एक जूनियर डॉक्टर को मुश्किल परिस्थितियों में सिखाने की कोशिश करता है और खुद भयानक दर्द सहते हुए भी अपने मिशन पर ध्यान बनाए रखता है।
सीमित कलाकारों की समस्या और वीएफएक्स की खामियां
इस फिल्म में एक बड़ी समस्या यह भी है कि इसके ज्यादातर किरदार केवल आवाज़ों तक सीमित हैं। स्क्रीन पर केवल सोहम शाह हैं, जो पूरी फिल्म को अकेले संभालने की कोशिश करते हैं। यह उनकी परफॉर्मेंस को और चुनौतीपूर्ण बनाता है, लेकिन कुछ जगहों पर यह थोड़ा ज्यादा खिंचा हुआ महसूस होता है। इसके अलावा, फिल्म में इस्तेमाल किए गए कुछ वीएफएक्स और कंप्यूटर ग्राफिक्स इतने अनाड़ी हैं कि वे कहानी की गंभीरता को हल्का कर देते हैं।
अंतिम फैसला
‘Crazxy’ का कॉन्सेप्ट दिलचस्प है और इसकी शुरुआती पकड़ दर्शकों को स्क्रीन से जोड़े रखती है। लेकिन जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है, इसकी कमजोर स्क्रिप्ट और धीमी गति इसके प्रभाव को कम कर देती है। सोहम शाह ने एक अच्छा प्रयास किया है, लेकिन एक सीमित स्क्रीनप्ले और कमजोर वीएफएक्स फिल्म को औसत बना देते हैं।
रेटिंग: ⭐⭐⭐ (3/5)
यदि आप थ्रिलर फिल्मों के शौकीन हैं और सोहम शाह की एक्टिंग पसंद करते हैं, तो एक बार ‘Crazxy’ देख सकते हैं, लेकिन यह फिल्म आपकी उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतरती।
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