BY: Yoganand Shrivastva
कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश सचिव शाहरुख पठान ने इस फिल्म के विरोध में सार्वजनिक बयान जारी करते हुए कहा है कि ‘उदयपुर फाइल्स’ को भोपाल में रिलीज नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने फिल्म को समाज में सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने वाली बताया और कहा कि यह एक खास समुदाय को टारगेट करती है।
पठान ने सेंसर बोर्ड की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बोर्ड अब एक राजनीतिक एजेंडे पर काम कर रहा है और ऐसी फिल्में पास कर रहा है जो समाज को विभाजित कर सकती हैं। उन्होंने भोपाल के सभी सिनेमाघर मालिकों से आग्रह किया कि वे फिल्म की समीक्षा करें और अगर यह किसी धर्म विशेष के विरुद्ध है तो इसका प्रदर्शन न करें—अन्यथा विरोध प्रदर्शन के लिए तैयार रहें।
कोर्ट की कार्यवाही: हाईकोर्ट ने लगाई अंतरिम रोक
इस बीच, दिल्ली हाईकोर्ट ने फिल्म की रिलीज पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह फैसला जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी और अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद लिया गया। याचिकाओं में कहा गया कि फिल्म समाज में सांप्रदायिक तनाव और असंतुलन पैदा कर सकती है।
कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को केंद्र सरकार के सामने आपत्ति दर्ज कराने के लिए दो दिन का समय दिया, और केंद्र को सिनेमा एक्ट की धारा 6 के तहत एक हफ्ते में पुनर्विचार कर निर्णय लेने को कहा है। इसके पहले यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा था, लेकिन शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट का रुख करने की सलाह दी थी।
क्यों विवादों में है ‘उदयपुर फाइल्स’?
यह फिल्म 2022 में राजस्थान के उदयपुर में दर्जी कन्हैयालाल की हत्या पर आधारित है। फिल्म के ट्रेलर में नूपुर शर्मा की टिप्पणी, ज्ञानवापी विवाद जैसे विषयों को दिखाया गया है, जिसे लेकर कई संगठनों ने आपत्ति जताई है। आलोचकों का कहना है कि ये दृश्य सामाजिक सौहार्द्र को बिगाड़ सकते हैं।
वहीं दूसरी ओर, कन्हैयालाल के बेटे यश तेली ने नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि, “तीन साल से हमें न्याय नहीं मिला और अब जब हमारे पिता की कहानी सामने आ रही है, तब इसे भी रोक दिया गया।”
मुस्लिम समुदाय के धार्मिक नेताओं ने जताई चिंता
वाराणसी के शहर मुफ्ती मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी ने भी इस फिल्म को लेकर विरोध जताया है। उन्होंने डीएम और पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर फिल्म की रिलीज रोकने की मांग की है। उनका कहना है कि फिल्म में दर्शाए गए दृश्य मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं और देश में अस्थिरता फैला सकते हैं।
फिल्म को टैक्स फ्री करने की मांग भी उठी
जहां एक ओर विरोध हो रहा है, वहीं कुछ संगठन फिल्म को समर्थन भी दे रहे हैं। ज्ञानवापी विवाद में याचिकाकर्ता रहीं महिलाओं और उनके अधिवक्ताओं ने वाराणसी के एडीएम से मिलकर फिल्म को टैक्स फ्री करने की मांग की है। उनका कहना है कि यह फिल्म हिंदू समाज के साथ हुए अन्याय को सामने लाती है और इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचना चाहिए।
कन्हैयालाल की पत्नी का प्रधानमंत्री को पत्र
फिल्म की रिलीज पर रोक लगने के बाद, कन्हैयालाल की पत्नी जशोदा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है। उन्होंने लिखा कि, “मैंने यह फिल्म देखी है, इसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है। यह केवल मेरे पति की हत्या की सच्चाई को दिखाती है। अगर यह भी नहीं दिखा सकते, तो फिर सच्चाई कहां बोलेगी?”
‘उदयपुर फाइल्स’ को लेकर चल रहा विवाद अभी थमता नजर नहीं आ रहा है। एक ओर जहां इसे एक समुदाय पर हमले के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे पीड़ित पक्ष की आवाज के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। कोर्ट के निर्देशों के अनुसार अब केंद्र सरकार की पुनरीक्षण रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके बाद तय होगा कि यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज होगी या नहीं। तब तक यह मामला सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बना रहेगा।





