संवाददाता: अविनाश चंद्र
क्या है मामला?
चिरमिरी के छोटा बाजार लहड़ी महाविद्यालय के पास स्थित लगभग 8 साल पुराने सामुदायिक भवन पर नगर निगम द्वारा ठेकेदार के माध्यम से दूसरा फ्लोर बनवाया जा रहा है। लेकिन इस कार्य के दौरान कई महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग और सुरक्षा मानकों की ऊँची-ऊँची अनदेखी की जा रही है:
- निर्माण स्थल पर न तो सूचना पटल लगा है, न कोई निरीक्षण अधिकारी मौजूद है।
- निर्माण एस्टीमेट की कोई प्रति उपलब्ध नहीं, जिससे लागत और गुणवत्ता अस्पष्ट है।
- पुराने भवन की दीवारों व बीमों में दरारे और झुकाव जैसे लक्षण दिख रहे हैं — ये संकेत हैं कि निर्माण की नींव मजबूत नहीं, बल्कि जोखिमपूर्ण हो गई है।
क्यों खतरे से खाली नहीं मामला?
- दरारें व झुकाव संरचनात्मक कमजोरी का स्पष्ट संकेत देते हैं।
- यदि कोई भारी वर्षा, भू-स्खलन या भार बदलाव हो, तो भवन का ढहना संभव है।
- ऐसी परिस्तिथियाँ मानसून के दौरान घातक साबित हो सकती हैं, जब सामग्री और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा की संभावना पर प्रश्नचिन्ह लगते हैं।
जिम्मेदार कौन?
ठेकेदार: निर्माण को गति देने के चक्कर में न्यूनतम सुरक्षा मापदंडों तक की अनदेखी कर रहा है।
नगर निगम टेक्नीकल टीम (जैसे इंजीनियर विक्टर वर्मा): जांच और निरीक्षण का काम करते दिखें — लेकिन व्यवहार में लापरवाही उनके कार्य प्रणाली में स्पष्ट है।
महापौर और इंजीनियर का केवल निजी निरीक्षण की बात कहना बनावटी नजर आता है:
“मैं साइड पर जाकर देख लूंगा” — जबकि यह निरीक्षण शुरुआती चरण में होना चाहिए था, न कि अंतिम अवस्था तक खिंचवाया गया।
कहाँ-कहाँ खुली लापरवाही की राह?
चिरमिरी में विकास कार्यों पर अक्सर कमिशनखोरी और भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। कई योजनाएं—जैसे ‘मंगल भवन’ या ‘चौपाटी’—एसईसीएल की आपत्तियों में अटकी रहीं। इससे यहां की विकास परियोजनाओं की उपेक्षा बनी रही The Sootr।
अगला कदम: चाहिए क्या?
| जिम्मेदार पक्ष | अपेक्षित कार्रवाई |
|---|---|
| नगर निगम / ठेकेदार | निर्माण तत्काल रोका जाए, संरचनात्मक जांच कराई जाए |
| राज्य प्राधिकरण / प्रशासन | इंजीनियरिंग टीम भेज कर साइट का ऑडिट कराएं |
| स्थानीय मीडिया और समुदाय | फोटोज, वीडियो, रिपोर्टिंग के ज़रिए प्रशासन पर दबाव बनाएं |





