Report: Rakesh Chandwanshi
Chhindwara जिले में मिलावटी मिठाइयों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताज़ा मामला अमरवाड़ा स्थित ‘श्री महालक्ष्मी बीकानेर मिष्ठान’ का है, जहाँ गाजर का हलवा खाने से एक साथ 8 लोगों की तबीयत बिगड़ गई। इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन की ढिलाई और त्योहारों के बाद सुस्त पड़े खाद्य विभाग की पोल खोल दी है।

गर्भवती महिला और डेढ़ साल के बच्चे की हालत गंभीर
Chhindwara पीड़ितों में एक गर्भवती महिला और डेढ़ साल का मासूम बच्चा भी शामिल है। हलवा खाने के कुछ देर बाद ही सभी को उल्टी और जी मिचलाने की शिकायत हुई, जिसके बाद उन्हें आनन-फानन में अस्पताल पहुँचाया गया। गर्भवती महिला की बिगड़ती हालत को देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया है, जबकि मासूम बच्चे की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। इस घटना से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

प्रशासन का एक्शन: दुकान और गोदाम किए गए सील
Chhindwara मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम हेमकरण धुर्वे के निर्देश पर तहसीलदार सृष्टि डेहरिया, खाद्य विभाग की टीम और पुलिस बल मौके पर पहुँचा। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बीकानेर मिष्ठान की दुकान और उसके गोदाम को सील कर दिया है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने गाजर के हलवे के नमूने (Samples) लेकर उन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया है। अब रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि हलवे में किस तरह की मिलावट या खराबी थी।
सिस्टम पर सवाल: क्या सिर्फ घटना के बाद जागेगा विभाग?
Chhindwara यह घटना खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यशैली पर कई कड़वे सवाल खड़े करती है। अक्सर देखा जाता है कि विभाग केवल हादसे होने के बाद ही “सैंपलिंग” की औपचारिकता निभाता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि विभाग नियमित रूप से औचक निरीक्षण करता, तो बासी और दूषित भोजन परोसने वाले दुकानदारों में कानून का खौफ होता। क्या प्रशासन केवल दुकान सील करने तक सीमित रहेगा, या जनता की जान से खिलवाड़ करने वाले ऐसे मिलावटखोरों का लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द किया जाएगा?
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