by: vijay nandan
रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने सरकारी कामकाज में पारदर्शिता, समय पालन और प्रशासनिक दक्षता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बड़ा कदम उठाया है। आज यानि 1 दिसंबर 2025 से मंत्रालय परिसर के दोनों भवनों महानदी भवन और इन्द्रावती भवन में आधार-आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली (AEBAS) अनिवार्य कर दी गई है। अब सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को इन-आउट दोनों समय बायोमेट्रिक दर्ज कराना होगा, लेट आने वालों पर कार्रवाई होगी।
क्यों लिया गया फैसला?
राज्य सरकार ने उपस्थिति प्रक्रिया को हाई-टेक और पूरी तरह पारदर्शी बनाने का निर्णय लिया है। इस व्यवस्था से सरकारी विभागों में समयपालन सुनिश्चित होगा और गैर-हाजिरी या देरी जैसी समस्याओं पर नकेल कसी जा सकेगी।

मुख्य सचिव ने देखा था लाइव डेमो
पिछले महीने राज्य के मुख्य सचिव विकास शील ने मंत्रालय में फेशियल ऑथेंटिकेशन और थम्ब-बेस्ड AEBAS का लाइव प्रदर्शन देखा था। सिस्टम की कार्यप्रणाली संतोषजनक पाई गई, जिसके बाद उन्होंने इसे मंत्रालय स्तर पर अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए।
किन पर लागू?
पहले चरण में अवर सचिव और उनसे वरिष्ठ सभी अधिकारी इस प्रणाली के दायरे में आएंगे। जनवरी से इसे सभी संचालनालयों में और उसके बाद जिले स्तर के सरकारी कार्यालयों में लागू करने की तैयारी है।
दो विकल्प, इन और आउट दोनों जरूरी
कर्मचारियों व अधिकारियों को उपस्थिति दर्ज करने के लिए दो विकल्प दिए गए हैं, प्रवेश द्वारों पर लगी आधार-सक्षम थम्ब-बेस्ड बायोमेट्रिक मशीनें, जहां अंगूठा लगाकर उपस्थिति दर्ज होगी। स्मार्टफोन पर उपलब्ध आधार आधारित फेशियल वेरिफिकेशन सिस्टम, जिससे मोबाइल के माध्यम से ही एंट्री और एग्जिट की जा सकेगी। नई व्यवस्था का उद्देश्य मंत्रालय में अनुशासन, पारदर्शिता और बेहतर प्रशासनिक प्रदर्शन सुनिश्चित करना है। इससे सरकारी कामकाज में जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।





