केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की छत्तीसगढ़ यात्रा से ठीक पहले, माओवादियों के खिलाफ चल रहे अभियान में बड़ी कामयाबी मिली है। सुकमा जिले में पीपल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) बटालियन के चार प्रमुख सदस्यों ने सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया, जिनमें बटालियन प्रमुख बारसे देवा के भाई बारसे सन्ना भी शामिल हैं।
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क्यों हार मानी माओवादियों ने?
- 2026 तक नक्सल-मुक्त भारत के लक्ष्य के तहत सुरक्षा बलों ने लगातार ऑपरेशन तेज किए।
- पिछले 6 महीने में बीजापुर-दंतेवाड़ा सीमा पर दो बड़े मुठभेड़ों में 48 नक्सली ढेर, जिनमें 8 लाख के इनाम वाले कमांडर डीवीसीएम हुंगा और वागा शामिल थे।
- आतंक के चलते बचे हुए नक्सलियों ने सरेंडर करना उचित समझा।
सरेंडर करने वालों पर कितना इनाम?
- दो नक्सलियों पर 8-8 लाख, जबकि दूसरे दो पर 2-2 लाख का इनाम था।
- सरकार की 2025 पुनर्वास नीति के तहत हर आत्मसमर्पणकर्ता को 50,000 रुपये + कपड़े दिए गए, साथ ही अन्य लाभों का भी आश्वासन।
बारसे सन्ना का नक्सली सफर
- 2010 में बाल संघम से शुरुआत की।
- धीरे-धीरे PLGA बटालियन नंबर वन का प्रमुख सदस्य बना।
- 2023 में सड़क अवरोध जैसे कई घटनाओं में शामिल रहा।
अमित शाह की बैठक और आगे की रणनीति
गृह मंत्री ने छत्तीसगढ़ में अधिकारियों के साथ उच्च-स्तरीय बैठक कर नक्सल उन्मूलन की प्रगति की समीक्षा की। सुरक्षा बलों का दबाव इतना कारगर रहा कि वेस्ट बस्तर डिवीजन की कंपनी नंबर 2 पूरी तरह खत्म हो गई।
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