BY: Yoganand Shrivastva
उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित धर्मांतरण मामले में गिरफ्तार किए गए छांगुर बाबा उर्फ जलालुद्दीन से जुड़ी जानकारियाँ अब और भी चौंकाने वाली होती जा रही हैं। यूपी एटीएस द्वारा की जा रही पूछताछ में यह सामने आया है कि छांगुर बाबा ने पूरे धर्मांतरण नेटवर्क को एक कोड वर्ड सिस्टम के ज़रिए संचालित किया, जिससे एजेंटों और सहयोगियों से संवाद करते हुए किसी को संदेह न हो।
धर्मांतरण के लिए तय थे कोड वर्ड
सूत्रों के अनुसार, छांगुर बाबा अपने एजेंटों से बातचीत के दौरान सीधे शब्दों का प्रयोग न करके कोड वर्ड्स में बात करता था। जांच में जो कॉल रिकॉर्डिंग सामने आई हैं, उनमें हर शब्द के पीछे एक अलग मतलब छिपा हुआ पाया गया। उदाहरण के लिए:
- “मिट्टी पलटना” – इस शब्द का अर्थ था किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन कराना।
- “प्रोजेक्ट” – इसका प्रयोग लड़कियों के लिए किया जाता था।
- “काजल” – इसका अर्थ था लड़कियों को मानसिक रूप से दबाव में लाना या परेशान करना।
- “दर्शन” – इस शब्द का प्रयोग तब होता था जब किसी व्यक्ति को छांगुर बाबा से मिलवाना होता था।
नेपाल बॉर्डर और अवैध मदरसे से जुड़ रहे तार
इस पूरे मामले की जड़ें अब अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर तक जा पहुंची हैं। जांच में सामने आया है कि छांगुर बाबा के नेपाल सीमा से सटे अवैध मदरसों से भी संबंध हैं। एटीएस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या इन संस्थानों को छांगुर बाबा फंडिंग करता था?
इसकी कॉल रिकॉर्डिंग और वित्तीय लेनदेन से जुड़े कई डिजिटल साक्ष्य यूपी एटीएस के पास हैं। संदेह है कि इन मदरसों के माध्यम से न केवल धार्मिक कट्टरता फैलाने, बल्कि बड़ी संख्या में धर्मांतरण कराने का काम भी चल रहा था।
धर्मांतरण के लिए फिक्स रेट
जांच में एक और बड़ा खुलासा यह हुआ है कि छांगुर बाबा ने जातियों के आधार पर धर्मांतरण के रेट तय कर रखे थे।
- एक जाति विशेष के व्यक्ति को मुस्लिम धर्म में बदलवाने के लिए अलग रकम तय थी।
- लड़कियों के मामले में तो हर “प्रोजेक्ट” का रेट तय था।
सूत्रों के मुताबिक, छांगुर बाबा मुस्लिम युवकों को धन देता था ताकि वे विशेष रूप से हिंदू लड़कियों को फंसाकर उनका धर्म परिवर्तन करा सकें। इसके लिए उन्हें मानसिक दबाव से लेकर शादी और जबरन मजहब बदलवाने तक की ट्रेनिंग दी जाती थी।
विदेशी फंडिंग से सिंडिकेट का संचालन
छांगुर बाबा का नेटवर्क केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं था। जांच में पाया गया कि यह पूरा सिंडिकेट मजहबी संस्थाओं और विदेशी फंडिंग के बल पर खड़ा किया गया था।
- कई एनजीओ और धर्म आधारित संगठनों के ज़रिए उसे धार्मिक उद्देश्यों के लिए भारी रकम विदेशों से भेजी जाती थी।
- इन पैसों का इस्तेमाल धर्म परिवर्तन, अवैध मदरसों की स्थापना और प्रचार-प्रसार में किया जाता था।
सिंडिकेट की संरचना
यूपी एटीएस को जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक छांगुर बाबा ने एक पूरी टीम बना रखी थी:
- स्थानीय एजेंट जो गांवों और छोटे कस्बों में लोगों की पहचान करते थे।
- प्रशिक्षित युवक, जिन्हें विशेष लड़कियों को फुसलाने और शादी के बाद धर्मांतरण कराने की जिम्मेदारी दी जाती थी।
- कोडवर्ड कम्युनिकेशन टीम, जो सारे काम को छिपाकर डिजिटल माध्यम से संवाद करती थी।
- और इन सबके ऊपर था छांगुर बाबा, जो इस पूरे सिस्टम का मास्टरमाइंड था।
एटीएस के पास कॉल रिकॉर्डिंग सबूत
यूपी एटीएस के हाथ लगी कॉल रिकॉर्डिंग में इन कोडवर्ड्स के प्रयोग की पुष्टि हुई है। इन रिकॉर्डिंग्स को डिकोड किया गया है और उनके आधार पर अब एफआईआर और चार्जशीट की तैयारी हो रही है। कुछ एजेंटों के नाम और लोकेशन भी ट्रेस कर लिए गए हैं।
छांगुर बाबा का यह नेटवर्क सिर्फ एक धार्मिक मामला नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक-राजनीतिक अपराध है, जिसमें धर्म, महिला, जाति, विदेशों से पैसा और संगठित आपराधिक तंत्र का मिला-जुला चेहरा सामने आ रहा है।
उत्तर प्रदेश एटीएस की तफ्तीश अब तेज हो चुकी है और जल्द ही इस पूरे रैकेट से जुड़े और भी बड़े चेहरे सामने आने की संभावना है।
“मिट्टी पलटना” कोई आम शब्द नहीं था, यह था एक ऐसा इशारा, जिसके बाद बदल जाती थी किसी की ज़िंदगी और पहचान।”





