चैत्र नवरात्रि का नौवां दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री को समर्पित है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और कथा सुनने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस वर्ष 6 अप्रैल 2025 को नवमी तिथि मनाई जा रही है। आइए, जानते हैं मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि, कथा और इसका विशेष महत्व।
मां सिद्धिदात्री की कथा एवं महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने मां सिद्धिदात्री की कठोर तपस्या करके उनसे सभी सिद्धियां प्राप्त की थीं। इसी कारण भगवान शिव का अर्धनारीश्वर रूप प्रसिद्ध हुआ, जो आधे शिव और आधे शक्ति के रूप में प्रकट हुए।

मां सिद्धिदात्री हिमालय की शिखर पर विराजमान हैं और साधकों को ज्ञान, धन, स्वास्थ्य एवं मोक्ष प्रदान करती हैं। नवरात्रि के नौवें दिन इनकी पूजा करने से भक्तों के सभी संकट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
नवमी तिथि पर पूजन विधि
- सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल पर मां सिद्धिदात्री की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- घी का दीपक जलाएं और फूल, अक्षत, फल आदि अर्पित करें।
- मां की कथा का पाठ करें या ध्यानपूर्वक सुनें।
- अंत में आरती करके प्रसाद वितरित करें।
कथा श्रवण का फल
जो भक्त नवमी तिथि पर मां सिद्धिदात्री की कथा श्रद्धापूर्वक सुनते हैं, उन्हें समस्त सिद्धियों की प्राप्ति होती है। मां की कृपा से जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।
राम नवमी से जुड़ी खास जानकारी
चैत्र नवरात्रि के अगले दिन राम नवमी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव को धूमधाम से मनाने की परंपरा है।
ध्यान दें: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान से पहले विद्वान पंडित या ज्योतिषी से सलाह लें।





