,

ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो को 27 साल जेल, क्या है पूरा मामला?

ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो को 27 साल जेल, क्या है पूरा मामला?

BY: MOHIT JAIN

ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो को तख्तापलट की साजिश और हत्या की योजना के आरोप में 27 साल 3 महीने की जेल की सजा सुनाई गई है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के 5 में से 4 जजों ने सुनाया। बोल्सोनारो इस समय घर में नजरबंद हैं और उन्होंने सभी आरोपों से इनकार किया है।


तख्तापलट और साजिश का आरोप

  • पृष्ठभूमि: 70 वर्षीय बोल्सोनारो ने 2022 के राष्ट्रपति चुनाव हारने के बाद नए राष्ट्रपति लुईस इनासियो लूला दा सिल्वा की सरकार गिराने की योजना बनाई थी।
  • हत्या की साजिश: इस साजिश के तहत राष्ट्रपति लूला, उपराष्ट्रपति गेराल्डो अल्कमिन और सुप्रीम कोर्ट के जज एलेक्जेंडर डी मोरेस की हत्या की योजना थी।
  • कम सजा का कारण: इस अपराध के लिए अधिकतम 43 साल की सजा हो सकती थी, लेकिन उनकी उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए सजा कम की गई।

बोल्सोनारो पर लगे आरोप

बोल्सोनारो पर कुल 5 गंभीर आरोप साबित हुए:

  1. तख्तापलट का प्रयास
  2. एक सशस्त्र आपराधिक संगठन का हिस्सा होना
  3. लोकतांत्रिक कानून व्यवस्था को हिंसा से खत्म करने की कोशिश
  4. हिंसा में शामिल होना
  5. राज्य की संपत्ति के लिए गंभीर खतरा पैदा करना

ट्रंप और अमेरिकी नेताओं की प्रतिक्रिया

  • पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस फैसले को “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” बताया।
  • ट्रंप ने चेतावनी दी कि वे ब्राजील से आने वाले सामान पर 50% टैरिफ लगाने पर विचार कर सकते हैं, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ सकता है।
  • अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी फैसले को गलत बताते हुए कहा कि अमेरिका इस पर कदम उठाएगा, हालांकि उन्होंने स्पष्ट नहीं किया कि कौन से कदम।

आगे की कानूनी लड़ाई

  • बोल्सोनारो सुप्रीम कोर्ट के 11 जजों की पीठ में अपील करेंगे।
  • एक अन्य मामले में उन पर पहले ही 2030 तक चुनाव लड़ने पर रोक लग चुकी है।
  • माना जा रहा है कि वे अब अपनी राजनीतिक पार्टी से किसी उत्तराधिकारी को आगे लाकर लूला को अगले चुनाव में चुनौती देने की रणनीति बना सकते हैं।

ब्राजील की राजनीति पर असर

यह फैसला ब्राजील की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है। बोल्सोनारो के समर्थक इस फैसले को राजनीतिक साजिश बता रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे लोकतंत्र की जीत के रूप में देख रहा है।