BY: Yoganand Shrivastva
लखनऊ: दिल्ली में हुए हालिया धमाके की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। गिरफ्तार आतंकियों से पूछताछ में पता चला है कि उनका अगला निशाना अयोध्या और वाराणसी जैसे धार्मिक शहर थे। सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार की जा चुकी डॉ. शाहीन ने अयोध्या में एक स्लीपर मॉड्यूल सक्रिय कर रखा था और वहां विस्फोट की योजना लगभग तैयार थी।
जांच में सामने आया है कि आतंकी संगठन के इस मॉड्यूल का मकसद मंदिरों और भीड़-भाड़ वाले स्थानों को निशाना बनाना था ताकि अधिक से अधिक जनहानि हो सके। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता से यह साजिश सफल नहीं हो पाई। पुलिस द्वारा की गई समय रहते छापेमारी और गिरफ्तारी के कारण आतंकी अपनी योजना को अंजाम नहीं दे सके।
लाल किला ब्लास्ट हड़बड़ी में किया गया था
सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि दिल्ली के लाल किले के पास हुआ विस्फोट उनकी मुख्य योजना नहीं थी। ब्लास्ट में टाइमर या अन्य विस्फोटक उपकरणों का उपयोग नहीं किया गया, जिससे प्रतीत होता है कि यह जल्दबाजी में अंजाम दिया गया हमला था। पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह मॉड्यूल मूल रूप से अस्पतालों और घनी आबादी वाले इलाकों को टारगेट करना चाहता था।
10 नवंबर को हुआ था धमाका
गौरतलब है कि 10 नवंबर की शाम करीब 7 बजे दिल्ली के लाल किले के पास खड़ी एक कार में विस्फोट हुआ था। इस हादसे में 12 लोगों की मौत हो गई थी और 20 से अधिक लोग घायल हुए थे। धमाके में कई वाहन क्षतिग्रस्त हुए। घटना के बाद पूरे देश में सुरक्षा एजेंसियों ने बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया था।
तीन डॉक्टर निकले साजिश के मास्टरमाइंड
इस मामले में तीन नाम प्रमुख रूप से सामने आए हैं — डॉ. मुजम्मिल, डॉ. अदील अहमद डार और डॉ. उमर।
जानकारी के अनुसार, धमाके के वक्त डॉ. उमर की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि डॉ. मुजम्मिल और डॉ. अदील अहमद डार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसियां अब यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि अयोध्या के स्लीपर मॉड्यूल में और कौन-कौन शामिल था तथा उनकी स्थानीय मदद किसने की। यह खुलासा न केवल दिल्ली ब्लास्ट की दिशा बदल रहा है, बल्कि यह भी स्पष्ट कर रहा है कि आतंकी संगठन अब धार्मिक स्थलों को निशाना बनाकर देश के सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करने की कोशिश में हैं।





