By: Vandana Rawat
उत्तर प्रदेश में जल संरक्षण और जल संचय की दिशा में चल रहे कार्यों का प्रभाव अब राष्ट्रीय स्तर पर भी दिखने लगा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियों और स्थानीय प्रशासन के प्रभावी क्रियान्वयन के कारण प्रदेश ने छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कारों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को आयोजित समारोह में उत्तर प्रदेश के जिलों को सम्मानित किया।
उत्तरी क्षेत्र की श्रेणी में पहला स्थान मीरजापुर, दूसरा स्थान वाराणसी और तीसरा स्थान जालौन को मिला। वाराणसी जिले को ‘सर्वश्रेष्ठ जिला’ के रूप में दूसरा स्थान मिलने पर दो करोड़ रुपये का पुरस्कार प्रदान किया गया। जल संचय जन भागीदारी श्रेणी में गोरखपुर नगर निगम ने देश के टॉप–10 नगर निगमों में जगह बनाते हुए तीसरा स्थान हासिल किया।
जल संरक्षण में वाराणसी की बड़ी पहल

वाराणसी ने जल संचयन और नदी कायाकल्प में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। जिले में 25 हजार से अधिक जल संचयन संरचनाओं का निर्माण किया गया। इससे भूजल स्तर में सुधार देखने को मिला। नदी कायाकल्प परियोजनाओं, सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता अभियानों ने जल प्रबंधन को नई दिशा दी। इन पहलों ने वाराणसी को उत्तरी भारत में जल संरक्षण के आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित किया।
दूरदर्शी नीतियों का परिणाम
योगी सरकार की योजनाओं और जल उपयोग की प्रभावी रणनीति के कारण प्रदेश के कई जिलों ने जल संरक्षण में उत्कृष्ट कार्य किया है। मीरजापुर, वाराणसी और जालौन को मिले पुरस्कार इस बात का प्रमाण हैं कि प्रदेश में जल प्रबंधन को मजबूत करने के लिए दीर्घकालिक और कारगर कदम उठाए जा रहे हैं।
इन पुरस्कारों ने जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश को देश के बाकी राज्यों के लिए प्रेरणा का केंद्र बना दिया है।





